पचपदरा (बालोतरा)। एचआरआरएल (HRRL) रिफाइनरी की ‘कड़ी सुरक्षा’ एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बुधवार को रिफाइनरी परिसर के भीतर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, जहाँ एक XUV और बोलेरो गाड़ी के बीच भीषण भिड़ंत हो गई। गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन इस टक्कर ने रिफाइनरी प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्थाओं और नियमों की पोल खोलकर रख दी है।
बिना कागजात कैसे हो रही वाहनों की एंट्री?
हादसे के बाद जब दोनों वाहनों की जांच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सूत्रों के अनुसार, दोनों ही वाहनों के दस्तावेजों में भारी कमियां पाई गई हैं। जानकारी मिली है कि वाहनों का इंश्योरेंस (बीमा) और फिटनेस सर्टिफिकेट की अवधि काफी समय पहले ही समाप्त हो चुकी थी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि गेट पर मौजूद सुरक्षाकर्मी और आधुनिक तकनीक से लैस चेक-पॉइंट्स इन कमियों को पकड़ने में नाकाम क्यों रहे?
सड़क सुरक्षा के दावे केवल कागजों तक सीमित
रिफाइनरी के भीतर वाहनों की गति सीमा और सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।
- फिटनेस फेल वाहन: रिफाइनरी के अंदर ऐसे दर्जनों वाहन दौड़ रहे हैं जिनकी फिटनेस और इंश्योरेंस खत्म हो चुके हैं।
- ओवरस्पीडिंग: परिसर में निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन आम बात हो गई है।
- पहले भी हो चुके हादसे: यह कोई पहली घटना नहीं है; इससे पहले भी अधूरे कागजातों वाले वाहनों की भिड़ंत और बस पलटने जैसे हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई मजदूर घायल हुए थे।
सुरक्षा तंत्र पर उठते गंभीर सवाल
करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस मेगा प्रोजेक्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर अब उंगलियां उठ रही हैं।
- क्या सुरक्षा विभाग केवल मजदूरों की चेकिंग तक सीमित है?
- क्या वाहनों के पास (Pass) जारी करते समय दस्तावेजों की भौतिक जांच नहीं की जाती?
- आखिर किसके संरक्षण में ये ‘कबाड़’ वाहन रिफाइनरी की संवेदनशील सड़कों पर दौड़ रहे हैं?
प्रशासनिक सुस्ती या मिलीभगत? लगातार हो रहे इन हादसों के बावजूद एचआरआरएल प्रशासन और संबंधित ठेका फर्में मौन साधे हुए हैं। यदि समय रहते इन अवैध और अनफिट वाहनों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में कोई बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
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