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त्रिपुरा से गुजरात को जैविक सफेद तिल का निर्यात; 2023 से अब तक 5.50 करोड़ निर्यात

अगरतलाण. त्रिपुरा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने शुक्रवार को गुजरात के आणंद के लिए 1,000 किलोग्राम जैविक सफेद तिल ले जा रहे वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह राज्य के बढ़ते जैविक निर्यात क्षेत्र में एक और मील का पत्थर है।

कार्यक्रम के बाद मंत्री ने बताया कि तिल की खेप गुजरात के आणंद स्थित मीडिया माइंड्स को निर्यात कर दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि तिल की उच्च मांग को देखते हुए जल्द ही 5,000 किलोग्राम जैविक सफेद तिल की अतिरिक्त खेप गुजरात भेजी जाएगी।

 

नाथ के मुताबिक, लोकनाथ ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीसी), ढलाई ऑर्गेनिक एफपीसी और याप्री ऑर्गेनिक एफपीसी ने किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने और उनकी आय बढ़ाने के लिए सीधे किसानों से तिल की संयुक्त रूप से खरीद की।

मंत्री रतन लाल नाथ ने कहा, “त्रिपुरा के जैविक उत्पादों की लोकप्रियता राज्य के बाहर लगातार बढ़ रही है। यह उत्साहजनक है कि नए साल की शुरुआत में हम इस तरह की खेप भेज सकते हैं।”

 

उन्होंने निर्यात को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग देने के लिए इंटरनेशनल कॉम्पिटेंस सेंटर फॉर ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर (आईसीसीओए) और शील बायोटेक के प्रति आभार व्यक्त किया।

नाथ ने कहा कि पांच संगठन कृषि खरीद, किसानों को उचित प्रतिफल सुनिश्चित करने और कृषि उत्पादों के विपणन पर एफपी को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।

 

 

मंत्री ने आगे कहा, “किसान गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद तो पैदा करते हैं, लेकिन गुजरात जैसे राज्यों में उनका निर्यात करने के लिए संस्थागत सहयोग की आवश्यकता होती है। सरकार ने कृषि उत्पादक समुदायों (एफपीसी) और सेवा प्रदाताओं को बढ़ावा दिया है।”

उन्होंने बताया कि 2023-24 से अब तक त्रिपुरा से अन्य राज्यों और विदेशों में 5.50 करोड़ रुपए के जैविक उत्पादों का निर्यात किया जा चुका है।

नाथ ने कहा, “अगले महीने, त्रिपुरा की तीन एफपीसी जर्मनी में विश्व के अग्रणी जैविक खाद्य व्यापार मेले बायोफैच में भाग लेंगी।”

 

 

इसी बीच, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, त्रिपुरा कृषि विभाग ने हाल ही में नागपुर स्थित राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण और भूमि उपयोग योजना ब्यूरो (एनबीएसएस एंड एलयूपी) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि इस सहयोग का उद्देश्य राज्य के कई जिलों में कृषि योग्य भूमि पर गहन शोध करना है, जिससे टिकाऊ कृषि पद्धतियों और त्रिपुरा के लिए एक मजबूत कृषि भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो सके।

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