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UGRO Capital and Dun & Bradstreet Release Fourth MSME Connectivity Report: Indian MSMEs Show Strength Amid Global Challenges

UGRO Capital और Dun & Bradstreet ने जारी की चौथी MSME संपर्क रिपोर्ट: वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय MSME ने दिखाई मजबूती

मुंबई. डेटाटेक एनबीएफसी (NBFC) क्षेत्र की अग्रणी कंपनी UGRO Capital ने डन एंड ब्रॉडस्ट्रीट (Dun & Bradstreet) के सहयोग से अपनी चौथी ‘MSME संपर्क रिपोर्ट’ जारी कर दी है। यह रिपोर्ट भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की मौजूदा स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालती है।

प्रमुख निष्कर्ष: वैश्विक दबाव के बावजूद बढ़ा भरोसा

रिपोर्ट में 73,000 से अधिक MSMEs के विश्लेषण और 5,000 से अधिक व्यवसायों के राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण के आधार पर बताया गया है कि अमेरिकी टैरिफ (Tariffs) और निर्यात में गिरावट जैसी चुनौतियों के बावजूद भारतीय MSME क्षेत्र मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

रिपोर्ट की मुख्य बातें:

  • GDP में योगदान: MSME का भारत की जीडीपी में योगदान वित्त वर्ष 2021 के 27.3% से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में लगभग 30% होने का अनुमान है।

  • क्रेडिट ग्रोथ: सूक्ष्म और लघु उद्यमों को दिए जाने वाले ऋण (Credit) में सालाना 12% की वृद्धि दर्ज की गई है।

  • औपचारिकीकरण (Formalisation): उद्यम (Udyam) पंजीकरण में जबरदस्त उछाल देखा गया है। जनवरी 2025 में यह 58.46 मिलियन था, जो सितंबर 2025 तक बढ़कर 68.85 मिलियन हो गया।

  • NBFCs बने पहली पसंद: सर्वेक्षण में शामिल 83% MSMEs ने कहा कि उन्हें ऋण प्राप्त करने में कोई कठिनाई नहीं हुई, और ऋण के लिए उनकी पहली पसंद NBFCs रहे।

वैश्विक व्यापारिक तनाव का असर

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और चीन से आने वाले सस्ते सामानों के कारण टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स, केमिकल और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट जैसे क्षेत्रों के राजस्व (Revenue) मार्जिन पर दबाव देखा गया है। इसके बावजूद, घरेलू बाजार में मजबूत मांग और सरकार की क्रेडिट गारंटी योजनाओं के कारण ये क्षेत्र टिके हुए हैं।

विशेषज्ञों की राय

यूग्रो कैपिटल के संस्थापक और एमडी, शचींद्र नाथ ने कहा, “वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारत का MSME ईकोसिस्टम लचीला बना हुआ है। हमारा सर्वेक्षण बताता है कि डिजिटलीकरण और ऋण तक आसान पहुंच छोटे व्यवसायों की तस्वीर बदल रही है। यह देखना उत्साहजनक है कि 83% व्यवसायों को क्रेडिट मिलने में समस्या नहीं हो रही है।”

डन एंड ब्रॉडस्ट्रीट के ग्लोबल चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. अरुण सिंह ने कहा, “वैश्विक स्तर पर नीतिगत अनिश्चितता के बावजूद, भारतीय MSMEs में घरेलू ऑर्डर्स को लेकर आशावाद बढ़ा है। सरकार की पीएलआई (PLI) योजना और क्रेडिट गारंटी स्कीम ने इस क्षेत्र को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभाई है।”

नीतिगत सहायता और भविष्य की राह

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत सरकार ने MSMEs को वैश्विक उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए जीएसटी (GST) स्लैब में बदलाव और ब्याज दरों में कटौती जैसे कदम उठाए हैं। वित्त वर्ष 2025 में नीतिगत दरों में 100 बेसिस पॉइंट की कुल कटौती की गई है, जिससे कर्ज सस्ता हुआ है और व्यापार को गति मिली है।

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