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डीग पुलिस का 'ऑपरेशन काउण्टडाउन': दिल्ली में चल रहे बड़े अंतरराज्यीय फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 64 आरोपी गिरफ्तार व 2 नाबालिग रेस्क्यू

डीग पुलिस का ‘ऑपरेशन काउण्टडाउन’: दिल्ली में चल रहे बड़े अंतरराज्यीय फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 64 आरोपी गिरफ्तार व 2 नाबालिग रेस्क्यू

​एचडीएफसी और एक्सिस बैंक के फर्जी अधिकारी बनकर ओटीपी, सीवीवी और पैन डिटेल्स हासिल कर करोड़ों की ठगी करने वाला सिंडिकेट ध्वस्त, ​डीग पुलिस की टीम ने उत्तम नगर (दिल्ली) की तीन मंजिला इमारत में दी दबिश; 88 एंड्रॉइड मोबाइल, फर्जी आईडी कार्ड और बल्क डेटा बरामद

 

जयपुर। डीग पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ के. के निर्देशन में साइबर ठगों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन काउंटडाउन” के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली में संचालित एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर अपराध सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। गिरोह के सदस्य एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के अधिकारियों के रूप में पहचान बताकर लोगों को फोन एवं व्हाट्सएप के जरिए झांसे में लेते थे और ओटीपी, सीवीवी, पैन, जीमेल आईडी, जन्मतिथि सहित अन्य केवाईसी जानकारी हासिल कर उनके नाम पर दूरस्थ रूप से वित्तीय साधन खोलकर सुनियोजित तरीके से साइबर ठगी करते थे।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 64 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 31 युवक और 33 युवतियां शामिल हैं। साथ ही 2 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया और मौके से 88 एंड्रॉयड मोबाइल फोन जब्त किए गए। प्रारंभिक पूछताछ एवं अनुसंधान के बाद 19 युवक-युवतियों को उनके परिजनों के साथ रवाना किया गया।

फर्जी वेबसाइट और बैंक अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल—

मामले की शुरुआत एक्सिस बैंक डीग के शाखा प्रबंधक फूल सिंह द्वारा साइबर क्राइम थाना डीग में दी गई रिपोर्ट से हुई। रिपोर्ट के अनुसार संगठित साइबर अपराधी गिरोह उनके बैंक नाम, लोगो और साख का दुरुपयोग करते हुए फर्जी वेबसाइट के जरिए ग्राहकों से संपर्क कर रहा था। आरोपी खुद को बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताते और फर्जी आईडी कार्ड दिखाकर क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने अथवा नवीनीकरण का झांसा देते थे।

बातचीत के दौरान ग्राहकों से ओटीपी, सीवीवी, पैन कार्ड की जानकार, जीमेल आईडी जन्मतिथि और अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर ली जाती थी। इसके बाद प्राप्त जानकारी का इस्तेमाल ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जाता था।

दिल्ली की तीन मंजिला इमारत में चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर—

बैंक की प्रारंभिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के मुख्य सदस्य के रूप में आकाश पुत्र रामप्रकाश निवासी बनकट, थाना ताहवरपुर, जिला आजमगढ़, उत्तर प्रदेश की पहचान सामने आई। जांच में पता चला कि गिरोह द्वारा उत्तम नगर, दिल्ली की एक तीन मंजिला इमारत में अवैध कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था, जहां से राजस्थान के विभिन्न मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर साइबर ठगी की जाती थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कामां दिनेश यादव के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई। टीम ने संबंधित ठिकाने पर दबिश दी तो तीन मंजिला इमारत में 85 व्यक्ति मिले, जिनमें 41 युवक, 42 युवतियां और 2 नाबालिग शामिल थे। पूछताछ एवं अनुसंधान के बाद 64 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 2 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया।

नौकरी के नाम पर बेरोजगार युवाओं को बनाते थे साइबर ठगी का हिस्सा

जांच में गिरोह का एक चौंकाने वाला तरीका भी सामने आया। आरोपी वर्क इंडिया और अन्य जॉब पोर्टल्स से बेरोजगार युवाओं के रिज्यूमे हासिल करते थे। इसके बाद उन्हें फर्जी कंपनी में नौकरी का झांसा देकर गिरोह में शामिल किया जाता था।

गिरोह में बाकायदा ट्रेनिंग, इंटरव्यू, टीम लीडर और कर्मचारी जैसे अलग-अलग स्तर बनाए गए थे। युवाओं को 11 हजार से 15 हजार रुपये तक मासिक वेतन दिया जाता था। इसके अलावा ज्यादा लोगों से ठगी करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त कमीशन का लालच दिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को भी साइबर ठगी के काम में लगाया था।

लिखी हुई स्क्रिप्ट से ग्राहक को जाल में फंसाते थे—

साइबर ठग फोन कॉल और व्हाट्सएप जरिए लोगों से संपर्क करते थे। बातचीत के दौरान उन्हें पहले से तैयार लिखी हुई स्क्रिप्ट का इस्तेमाल करने के लिए दिया जाता था। स्क्रिप्ट के अनुसार बातचीत करते हुए ग्राहक का विश्वास जीता जाता और फिर बैंकिंग एवं व्यक्तिगत जानकारी हासिल की जाती थी।
पुलिस को मौके से एक्सिस बैंक, येस बैंक और एचडीएफसी बैंक के अधिकारियों के फर्जी आईडी कार्ड भी मिले हैं। इसके अलावा बड़ी मात्रा में ग्राहकों का बल्क डाटा बरामद हुआ है, जिसमें नाम, बैंक अकाउंट, पैन कार्ड, आवासीय पते और अन्य बैंकिंग जानकारियां शामिल हैं।

फर्जी सिम और करोड़ों के लेनदेन के सुराग—

जांच में सामने आया कि गिरोह द्वारा एक ही व्यक्ति के नाम पर कई फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। अब तक की जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध/अवैध वित्तीय लेनदेन के सुराग मिले हैं। गिरोह के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी कई शिकायतें दर्ज मिली हैं।

पुलिस अब गिरोह के मुख्य संचालकों, फर्जी डेटा उपलब्ध कराने वाले लोगों, बैंकिंग एवं सिम नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों तथा ठगी की रकम को आगे पहुंचाने वाले नेटवर्क के संबंध में गहन अनुसंधान कर रही है।

साइबर क्राइम थाना डीग में मामला दर्ज

पुलिस ने उपलब्ध रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस थाना डीग में प्रकरण दर्ज किया है। मामले में आगे की जांच एवं कानूनी कार्रवाई वीरेंद्र पाल, पुलिस उपाधीक्षक, साइबर क्राइम पुलिस थाना, डीग द्वारा की जा रही है।

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