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आगामी चुनावों में जीत की राह गांव से ही होकर गुजरेगी

एमएसपी का पूरा फायदा किसानों को दिलाने के लिए सरकार भरसक प्रयास करेगी, नहीं तो यहीं दांव सरकार को ले डूबेगा. किसानों का गुस्सा कम करने में जुटी सरकार

   टीना सुराणा

जयपुर. आगामी चुनावों में जीत की राह गांव से ही होकर गुजरेगी। ऐसे में खरीफ फसलों की बढ़ी एमएसपी का पूरा फायदा किसानों को मिले, इसके लिए सरकार ने अभी से कमर कस ली है। सरकार की उम्मीद तो यही है कि किसानों का गुस्सा घट जाएगा। लेकिन बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार एमएसपी को किसानों तक पहुंचा पाती है या नहीं। राह में सबसे बड़ा रोड़ा सरकारी खरीद की भ्रष्ट नीति और अनाज रखने के लिए गोदामों की कमी इस राह में सबसे बड़े रोड़े हैं। अब सरकार ने खरीफ फसलों की एमएसपी, लागत के ए2+एफएल फॉर्मूले से 1.5 गुना बढ़ाकर किसानों को फीलगुड मैसेज देने की कोशिश की है।

३० फीसदी किसानों को ही मिल पाता है एमएसपी-किसानों की उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य या उसके ऊपर बिके, इसका दारोमदार सरकारी खरीद पर ही टिका है। सरकारी खरीद का भ्रष्ट तंत्र और बुनियादी ढांचे की कमी इस राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। देश में 30 फीसदी किसानों को ही अपनी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल पाता है। सरकारी खरीद नीति में बदलाव की जरूरत है। राज्यों की आर्थिक सेहत बड़ी सरकारी खरीद के लिए दुरुस्त नहीं है। हक मानते हैं कि सरकार को हर राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से केवल चावल और गेहूं ही नहीं बांटना चाहिए। इसमें ट्रांसपोर्टेशन की लागत भी लगती है और पीडीएस में बांटा गया अनाज वहां की जनता की जरूरतों के अनुकूल नहीं होता। इससे बेहतर होगा कि सरकार अन्य फसलों की भी सरकारी खरीद करे और हर राज्य में पीडीएस के माध्यम से जरूरत के मुताबिक अनाज बांटे।

एमएसपी की दोहरी मार- किसानों को राहत देने के लिए एमएसपी में बढ़ोतरी दरअसल सरकार को दोहरी दुविधा में डाल देती है। एमएसपी में वृद्धि का फायदा किसानों तक पहुंचे नपहुंचे लेकिन बाजार में महंगाई जरूर बढ़ जाती है। खरीफ फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी का सीधा मतलब है चावल, दाल, कपास और सोयाबीन जैसी कमोडिटी के दाम का बढ़ जाना। एमएसपी में बढ़ोतरी से किसानों को कुछ राहत जरूर मिलेगी लेकिन इसका असर महंगाई पर भी देखने को मिलेगा। बढ़ी हुई एमएसपी के कारण खुदरा महंगाई में 40 से 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

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