New delhi. भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हेट स्पीच से जुड़े कई चर्चित मामलों को बंद कर दिया, जो वर्षों से राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बने हुए थे। इन मामलों में “गोली मारो” जैसे राजनीतिक भाषणों से लेकर “कोरोना जिहाद” जैसे विवादित नैरेटिव तक शामिल थे।
कोर्ट ने साफ कहा कि हेट स्पीच से निपटने के लिए देश में पहले से पर्याप्त कानून मौजूद हैं और नए निर्देश देने की आवश्यकता नहीं है। अदालत के अनुसार, समस्या कानून की कमी नहीं बल्कि उसके सही क्रियान्वयन (implementation) में है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नए अपराध बनाना या कानून तैयार करना विधायिका (Parliament) का काम है, न कि न्यायपालिका का। इसलिए अदालत ने लंबित याचिकाओं और अवमानना मामलों को समाप्त करते हुए कहा कि लोग उचित कानूनी मंचों का उपयोग कर सकते हैं।
इन मामलों में पहले कोर्ट ने कई बार सख्त रुख अपनाया था, जैसे स्वतः FIR दर्ज करने के निर्देश देना। लेकिन अब कोर्ट ने अपने रुख में बदलाव दिखाते हुए संस्थागत व्यवस्था और मौजूदा कानूनों पर भरोसा जताया है।
यह फैसला न्यायपालिका और विधायिका के बीच शक्तियों के संतुलन को भी दर्शाता है।
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