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भारत में वित्त वर्ष 2026 में दोपहिया वाहनों की बिक्री रिकॉर्ड 22 मिलियन तक पहुंच गई: रिपोर्ट

नई दिल्ली. भारत में दोपहिया वाहनों की बिक्री ने वित्त वर्ष 2026 में नया रिकॉर्ड बनाया है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू थोक बिक्री (व्होलसेल) लगभग 2.2 करोड़ (22 मिलियन) यूनिट तक पहुंच गई।

आईसीआरए की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में थोक बिक्री में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि रिटेल बिक्री साल-दर-साल आधार पर 28.7 प्रतिशत बढ़ी। पूरे वित्त वर्ष में दोपहिया वाहनों की घरेलू बिक्री लगभग 11 प्रतिशत बढ़ी।

रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में दोपहिया वाहनों की थोक बिक्री की वृद्धि दर घटकर 3-5 प्रतिशत रह सकती है। इसका कारण पिछले साल का उच्च आधार और अल नीनो के चलते कमजोर मानसून की संभावना है, जिससे ग्रामीण मांग पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक जीएसटी में सुधार और पुराने वाहनों को बदलने की बढ़ती मांग से बाजार को समर्थन मिलता रहेगा।

वित्त वर्ष 2026 में घरेलू थोक बिक्री में साल-दर-साल 10.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। जीएसटी सुधारों के चलते तीसरी और चौथी तिमाही में बिक्री को बढ़ावा मिला। जहां पहली छमाही में करीब 1 प्रतिशत की मामूली वृद्धि थी, वहीं दूसरी छमाही में यह बढ़कर 20.3 प्रतिशत हो गई।

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में रिटेल बिक्री 28.7 प्रतिशत बढ़ी और पूरे वित्त वर्ष 2026 में यह करीब 13 प्रतिशत रही।

इसमें कहा गया है कि इस बढ़ोतरी के पीछे जीएसटी सुधार, ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह में सुधार और बेहतर आर्थिक माहौल (जैसे रेपो रेट में कटौती और आयकर में राहत) जैसे कदम रहे, जिनसे उपभोक्ता मांग मजबूत हुई।

इसके अलावा, कंपनियों द्वारा एंट्री-लेवल और प्रीमियम दोनों तरह के ग्राहकों के लिए नए-नए मॉडल लॉन्च करने से भी बिक्री को बढ़ावा मिला।

इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग भी तेजी से बढ़ी। मार्च 2026 में इनकी रिटेल बिक्री 1,92,023 यूनिट तक पहुंच गई, जो साल-दर-साल 47.4 प्रतिशत अधिक है। पूरे वित्त वर्ष 2026 में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री 21.9 प्रतिशत बढ़ी।

दोपहिया बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी मार्च 2026 में 9.4 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि पूरे वित्त वर्ष में यह 3.3 प्रतिशत रही।

मार्च 2026 में निर्यात (एक्सपोर्ट) में भी 17.5 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई, हालांकि कुछ विदेशी बाजारों में चुनौतियां बनी रहीं। पूरे वित्त वर्ष 2026 में निर्यात 23.3 प्रतिशत बढ़ा, जिसका कारण नए उत्पाद और भारतीय ब्रांड्स की वैश्विक पहचान में सुधार रहा।

रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव सप्लाई चेन और निर्यात के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, और उद्योग से जुड़े लोग भू-राजनीतिक स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

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