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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई)

बाजार की पाठशाला : खुद का बिजनेस खड़ा करना है? सरकार की ये लोन योजनाएं करेंगी आपकी मदद!

नई दिल्ली। माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। देश की जीडीपी में इनका योगदान करीब 30 प्रतिशत है और 11 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं। एमएसएमई सेक्टर का मजबूत होना भारत के आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती अब भी आसान और सस्ते कर्ज तक पहुंच की बनी हुई है। इसी जरूरत को देखते हुए केंद्र सरकार ने एमएसएमई के लिए कई बिजनेस लोन योजनाएं शुरू की हैं, जिनका मकसद उद्यमियों को वित्तीय सहारा देना है।

 

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) की शुरुआत साल 2015 में की गई थी। इस योजना के तहत गैर-कॉरपोरेट और गैर-कृषि छोटे कारोबारियों को 10 लाख रुपए तक का लोन दिया जाता है। मुद्रा लोन को तीन कैटेगरी में बांटा गया है, जिसमें शिशु के तहत 50 हजार रुपए तक, किशोर के तहत 50,001 रुपए से 5 लाख रुपए तक और तरुण के तहत 5 लाख से 10 लाख रुपए तक का लोन मिलता है। ये लोन बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, एनबीएफसी और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों के जरिए दिए जाते हैं।

 

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) प्रधानमंत्री रोजगार योजना और ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम के विलय से बना है। इसका उद्देश्य युवाओं और पारंपरिक कारीगरों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए 25 लाख रुपए और सेवा क्षेत्र के लिए 10 लाख रुपए तक का लोन मिलता है। इसमें 15 से 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी दी जाती है, जो क्षेत्र और श्रेणी के अनुसार तय होती है।

 

क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (सीजीटीएमएसई) योजना को एमएसएमई मंत्रालय और सिडबी (एसआईडीबीआई) ने मिलकर शुरू किया है। इस योजना के तहत 2 करोड़ रुपए तक का लोन बिना किसी कोलैटरल या थर्ड पार्टी गारंटी के दिया जाता है। 5 लाख रुपए तक के लोन पर 85 प्रतिशत तक की गारंटी कवरेज मिलती है, जबकि बड़े लोन पर यह 75 प्रतिशत तक होती है।

 

क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी स्कीम (सीएलसीएसएस) खास तौर पर उन एमएसएमई के लिए है जो नई और आधुनिक तकनीक अपनाना चाहते हैं। इस योजना के तहत 1 करोड़ रुपए तक के लोन पर 15 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। इससे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स अपनी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ा सकती हैं।

 

इन सबके अलावा, एमएसएमई में इक्विटी की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने फंड ऑफ फंड्स योजना शुरू की है। इस स्कीम का कुल फंड साइज 50 हजार करोड़ रुपए है। इसके जरिए ग्रोथ की क्षमता रखने वाले एमएसएमई को वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी के माध्यम से निवेश उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे शेयर बाजार में लिस्ट हो सकें और निजी निवेश आकर्षित कर सकें।

 

सिडबी (एसआईडीबीआई) के मेक इन इंडिया लोन फॉर एंटरप्राइजेज (स्माइल यानी एसएमआईएलई) योजना के तहत एमएसएमई को सॉफ्ट लोन दिया जाता है, जिसका उद्देश्य छोटे उद्यमों को आधुनिक तकनीक अपनाने और विस्तार में मदद करना है। इस योजना में मशीनरी के लिए न्यूनतम 10 लाख रुपए और अन्य जरूरतों के लिए 25 लाख रुपए तक का लोन मिलता है, जिसकी चुकाने की अवधि 10 साल तक हो सकती है।

 

सरकार ने ’59 मिनट में एमएसएमई लोन’ योजना के तहत लोन अप्रूवल प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया है। इस स्कीम में 1 लाख से 5 करोड़ रुपए तक का लोन मिलता है और ब्याज दर 8.5 प्रतिशत से शुरू होती है। आईटी और जीएसटी कंप्लायंट बिजनेस इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण लोन जल्दी मंजूर और जारी होता है।

 

सरकार की ये लोन योजनाएं एमएसएमई को बिना गारंटी कर्ज, क्रेडिट गारंटी, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और नए बिजनेस की शुरुआत में मदद करती हैं। इन योजनाओं का सही इस्तेमाल कर उद्यमी न सिर्फ अपने कारोबार को मजबूत कर सकते हैं, बल्कि रोजगार सृजन और देश की आर्थिक वृद्धि में भी योगदान दे सकते हैं।

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