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पोस्ट ऑफिस में एफडी कराने पर मिल रहा है बैंक से ज्यादा मुनाफा


टीना सुराणा. जयपुर. बैंक एफडी की जगह आप पोस्ट ऑफिस एफडी स्कीम में निवेश कर सकते हैं। यह बैंक एफडी की तुलना में सुरक्षित निवेश है क्योंकि इसमें निवेशक की पूंजी और कमाए गए ब्याज पर सरकारी गारंटी मिलती है। आपको बता दें कि हाल में सरकार ने ब्याज दरें बढ़ा दी है। पोस्ट ऑफिस टर्म डिपाजिट में 1.2.3 और पांच साल की जमा स्कीम हैं। किसी एक अकाउंट में सिर्फ एक बार ही निवेश किया जा सकता है। आप हालांकि किसी पोस्ट ऑफिस में जितने भी चाहें अकाउंट खोल सकते हैं। इस स्कीम में न्यूनतम निवेश 200 रुपये से किया जा सकता है। इसके बाद 200 रुपये के गुणक में निवेश किया जा सकता है। सरकार वित्त वर्ष की हर तिमाही की शुरुआत में तय करती है। जनवरी-मार्च तिमाही के लिए सरकार ने ब्याज दरों को ऐलान कर दिया है। एक साल के टर्म डिपॉजिट पर अब 6.9 फीसदी के मुकाबले 7 फीसदी ब्याज मिलेगा वहीं तीन साल की टर्म डिपॉजिट दरें 7.2 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दी गई है। दो साल की टर्म डिपॉजिट दरें 7 फीसदी पर बरकरार है। 5 साल की डिपॉजिट दरें 7. 8 फीसदी पर स्थिर है। निवेश के इस विकल्प में ब्याज सालाना मिलता है लेकिन इसकी गणना हर तिमाही की जाती है। इस हिसाब से अगर पोस्ट ऑफिस अकाउंट एक साल का है तो यह ब्याज समेत वापस मिल जाएगा। निवेश के इस विकल्प में ब्याज सालाना मिलता है लेकिन इसकी गणना हर तिमाही की जाती है। इस हिसाब से अगर पोस्ट ऑफिस अकाउंट एक साल का है तो यह ब्याज समेत वापस मिल जाएगा। अगर अकाउंट की मैच्योरिटी के वक्त ब्याज के साथ कुल रकम 20,000 रुपये से अधिक होती है तो यह निवेशक को नकद नहीं मिलती, इससे अधिक की रकम चेक के माध्यम से ही मिलेगी। अगर आप हर साल ब्याज लेने के लिए नहीं जाना चाहते तो आप पोस्ट ऑफिस को यह निर्देश दे सकते हैं कि सालाना ब्याज को आपके पोस्ट ऑफिस बचत खाते में ट्रांसफर कर दिया जाए। यहां भी आपको चार फीसदी सालाना के हिसाब से ब्याज मिलेगा। यह सुविधा दो, तीन या पांच साल की अवधि वाले के साथ मिलती है। अगर आप सालाना ब्याज नहीं निकालना चाहते तो आप पोस्ट ऑफिस में यह आवेदन भी दे सकते हैं कि आपके खाते के सालाना ब्याज को पोस्ट ऑफिस के ही रेकरिंग डिपाजिट में 12 मासिक किस्त में ट्रांसफर कर दिया जाए। हर साल इसके लिए निवेशक को नियत तारीख से पहले पोस्ट ऑफिस में एक नया आवेदन देना होता है। अगर आप ऊंचे टैक्स ब्रैकेट में हैं तो कर चुकाने के बाद इस पर ब्याज दर बहुत कम हो जाती है। अगर आप पांच साल वाली टर्म डिपॉजिट में निवेश कर रहे हैं तो उस पर इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80 बी के तहत टैक्स छूट प्राप्त कर सकते हैं।

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