गोपालगंज, बिहार। सेवलाइफ फाउंडेशन भारत में दुर्घटना के बाद उपलब्ध आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की मुहिम में लगा हुआ है। इसके तहत सेवलाइफ ने आज आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के सहयोग और स्वास्थ्य विभाग गोपालगंज के साथ साझेदारी में एनएच 27 के गोपालगंज-कोटवा खंड पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कुचायकोट में ट्रॉमा केयर की बुनियादी व्यवस्था को अपग्रेड किया।
यह पहल ज़ीरो फैटैलिटी सॉल्यूशंस (जेडएफएस) प्रोग्राम के तहत की गई है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना के दौरान पीड़ितों को समय पर उचित और असरदार उपचार देने के लिए जरूरी ट्रॉमा केयर संसाधनों के साथ इस स्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड करना है।
सीएचसी कुचायकोट को अपग्रेड करने के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सा संसाधनों की आपूर्ति की गई है, जो ट्रॉमा के मरीज़ों को एयरवे मैनेजमेंट, सांस लेने में सहायता, रक्तस्राव नियंत्रण और पूरी तरह से पुनर्जीवित और स्वास्थ्य की स्थिति स्थिर रखने के लिए आवश्यक हैं। बेहतर सुविधाओं के साथ इस स्वास्थ्य केंद्र को ‘ट्रॉमा स्टैबलाइजेशन सेंटर’ के रूप में मज़बूत किया गया है। इस प्रयास से सड़क दुर्घटना से संबंधित पीड़ितों को ‘गोल्डन आवर’ में उचित और जीवन रक्षक उपचार मिलना सुनिश्चित होगा।
सड़क दुर्घटना के दौरान पीड़ितों को समय पर सही उपचार मिलने से मृत्यु और दीर्घकालिक अपंगता के मामले कम होते हैं। विशेषकर एनएच 27 जैसी अधिक दुर्घटना संभावित सड़कों पर जल्द चिकित्सा उपचार मिलने से दुर्घटना पीड़ितों के जीवित बचने की संभावनाएं बहुत बढ़ जाती हैं।
इस पहल पर सीएचसी कुचायकोट के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. श्याम सुंदर ने कहा: ‘‘हमारा स्वास्थ्य केंद्र एक व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे है। इसलिए यहां अक्सर ट्रॉमा के मरीज आते हैं, जिन्हें तत्काल उपचार मिलना जरूरी होता है। हमारे सीएचसी को ट्रॉमा केयर उपकरणों के साथ अपग्रेड किए जाने से ऐसे मरीज़ों को समय पर स्टैबलाइज करने और सटीक उपचार करने की हमारी क्षमता बहुत बढ़ जाएगी। मरीज़ों के उपचार के बेहतर परिणाम मिलेंगे और उनकी जान बचाने में यह बहुत महत्वपूर्ण सहयोग होगा।’’
इस पहल के बारे में सेवलाइफ फाउंडेशन के फाउंडर और सीईओ पीयूष तिवारी ने बताया, “भारत में सड़क दुर्घटना में बड़ी संख्या में लोग इसलिए दम तोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें समय पर और उचित उपचार नहीं मिलता है। इस कमी को दूर करने के लिए यह जरूरी है कि अधिक दुर्घटना संभावित सड़कों की खतरनाक जगहों पर ट्रॉमा केयर की मजबूत व्यवस्था की जाए। सीएचसी कुचायकोट को अपग्रेड करने का मकसद ऐसे पीड़ितों को ‘गोल्डन आवर’ में तुरंत स्टैबलाइज किया जाना है जिससे उनके जीवित बचने की संभावनाएं काफ़ी बढ़ जाती हैं। हम अपने जीरो फैटैलिटी सॉल्यूशन्स के माध्यम से सड़क दुर्घटना के हर चरण में जानें बचाने में सक्षम सिस्टम बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इस मुहिम में निरंतर सहयोग देने के लिए हम स्वास्थ्य विभाग, गोपालगंज के आभारी हैं।’’
गोपालगंज में हमारी यह पहल ट्रॉमा केयर सिस्टम में तत्परता बढ़ाने की ओर एक और कदम है। इससे भारत में सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मृत्यु और गंभीर रूप से जख्मी होने का बोझ कम होगा।
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