अटल कैंटीनों में रियायती भोजन के लिए रेटिना स्कैन अनिवार्य, एक व्यक्ति एक दिन में एक ही बार लंच ले सकेगा, 16 नई कैंटीन खोलने की योजना, कुल लक्ष्य 100 कैंटीन।
नई दिल्ली। राजधानी में संचालित अटल कैंटीनों में अब रियायती भोजन लेने के लिए रेटिना स्कैनिंग अनिवार्य कर दी गई है। दिल्ली सरकार ने यह कदम इस उद्देश्य से उठाया है कि सब्सिडी वाला भोजन अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके और एक ही व्यक्ति द्वारा कई बार भोजन लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सके।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, सभी 86 अटल कैंटीनों में रेटिना स्कैनिंग कैमरे लगाए गए हैं। जब कोई व्यक्ति भोजन कूपन खरीदता है, तो उसका रेटिना स्कैन कर केंद्रीयकृत प्रणाली में दर्ज किया जाता है। यह सिस्टम शहर की सभी अटल कैंटीनों से जुड़ा हुआ है।
अधिकारी ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति एक कैंटीन से लंच ले चुका है, तो उसी दिन वह दूसरी कैंटीन से दोबारा लंच नहीं खरीद सकेगा। हालांकि, वह शाम को डिनर ले सकता है और अगले दिन फिर से लंच प्राप्त कर सकता है।
100 कैंटीन खोलने का लक्ष्य
दिल्ली सरकार इस वर्ष 16 नई अटल कैंटीन खोलने की तैयारी में है। पहले ये कैंटीन मुख्य रूप से झुग्गी-झोपड़ी (JJ) क्लस्टरों के पास संचालित होती थीं, लेकिन अब प्रस्तावित नई कैंटीन अस्पतालों और विश्वविद्यालयों के आसपास स्थापित की जाएंगी, ताकि मरीजों, उनके परिजनों और छात्रों को सस्ता व पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
इस योजना के क्रियान्वयन के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। अधिकारियों का कहना है कि नई कैंटीनों के लिए भूमि की उपलब्धता के आधार पर स्थान चिन्हित किए जा रहे हैं और प्राथमिकता ऐसे सार्वजनिक संस्थानों को दी जा रही है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते हैं।
5 रुपये में पौष्टिक भोजन
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती (25 दिसंबर) के अवसर पर शुरू की गई इस योजना के तहत शहर में कुल 100 अटल कैंटीन स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन कैंटीनों में मात्र 5 रुपये में एक थाली भोजन उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें रोटी, चावल, सब्जी और अचार शामिल होता है।
कैंटीन दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक लंच और शाम 6:30 बजे से रात 9:30 बजे तक डिनर के लिए दिन में दो बार संचालित की जाती है। प्रत्येक कैंटीन में लंच और डिनर के लिए प्रतिदिन 500-500 प्लेट की सीमा तय की गई है। भोजन वितरण से पहले काउंटर से QR-आधारित टोकन जारी किए जाते हैं, जिससे व्यवस्था सुव्यवस्थित बनी रहे।
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