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यूपीआई के दौर में भी कैश का दबदबा! ₹40 लाख करोड़ के रिकॉर्ड ने खोला बड़ा राज

SBI रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा – आखिर क्यों बढ़ रहा है कैश?

Mumbai. देश में भले ही डिजिटल पेमेंट हर साल नए रिकॉर्ड बना रहे हों, लेकिन इसके बावजूद भारत में नकद (कैश) की मांग अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच चुकी है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में प्रचलन में मौजूद नकदी (Currency in Circulation) ₹40 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुकी है।
यह आंकड़ा कई बड़े सवाल खड़े करता है – जब यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग और मोबाइल वॉलेट जैसे विकल्प मौजूद हैं, तो फिर भी लोग कैश क्यों जमा कर रहे हैं?
SBI रिपोर्ट के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण है देश में आर्थिक गतिविधियों में तेजी, ग्रामीण और असंगठित क्षेत्रों में कैश पर निर्भरता, और त्योहारों, शादियों व चुनावों में बढ़ता खर्च। छोटे व्यापारी, दिहाड़ी मजदूर, किसान और स्थानीय बाजारों में आज भी नकद लेन-देन को ज्यादा सुरक्षित और आसान माना जाता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ने के बावजूद कैश का उपयोग कम नहीं हुआ है, बल्कि दोनों साथ–साथ बढ़ रहे हैं। नोटबंदी के बाद कैश की मांग में जो गिरावट आई थी, अब वह तेजी से फिर बढ़ रही है।
त्योहारों का सीजन, रियल एस्टेट सौदे, कृषि मंडियां, छोटे उद्योग और निजी लेन-देन जैसे कई क्षेत्र अब भी नकदी पर निर्भर हैं। इसके अलावा टैक्स से बचने और लेन-देन को गुप्त रखने की मानसिकता भी नकद के बढ़ते उपयोग की एक वजह मानी जा रही है।
इस रिपोर्ट से साफ है कि भारत भले ही डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन कैश की अहमियत अभी भी खत्म नहीं हुई है।

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