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India is important for Bangladesh, it is befriending China only for infrastructure: PK Sehgal

बांग्लादेश के लिए भारत जरूरी, चीन के साथ सिर्फ इंफ्रा के लिए कर रहा दोस्ती : पीके सहगल

नई दिल्ली। रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) पीके. सहगल ने भारत-बांग्लादेश संबंधों, बंगाल से घुसपैठ, वीजा और स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दों को लेकर आईएएनएस के साथ खास बातचीत की। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर के एक्स पोस्ट और अरुणाचल प्रदेश पर विदेश मंत्रालय की टिप्पणी पर बात की।

हाल ही में बांग्लादेश में भारत के राजदूत दिनेश त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। इसे लेकर रक्षा विशेषज्ञ पीके. सहगल ने कहा, “इसमें कोई शक नहीं है कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री साफतौर पर जानते हैं कि भारत बांग्लादेश के लिए बहुत जरूरी है। युनूस सरकार के दौरान दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी खराब हो गए थे। वो साफतौर पर जानते हैं कि भारत के साथ संपर्क देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए जरूरी है और दुनिया के साथ संपर्क के लिए हिंदुस्तान एकमात्र रास्ता है।”

उन्होंने आगे कहा कि वो जानते हैं कि पानी साझा करना, दोनों देशों के बीच 4 हजार किलोमीटर लंबे लाइन ऑफ कंट्रोल, राष्ट्रीय सुरक्षा, अप्रवासी, व्यापार, भारत से बांग्लादेश की तरफ नदियों का प्रवाह है। भारत काफी परेशानी खड़ी कर सकता है। लेकिन जो सबसे संवेदनशील मुद्दा है, वो शेख हसीना के प्रत्यर्पण का है। जहां तक मैं जानता हूं कि भारत किसी भी परिस्थिति में हसीना का प्रत्यर्पण नहीं करेगा।

पीके. सहगल ने कहा कि अगर आप ध्यान दें, तो बांग्लादेश ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंध बनाए रखे। यूनुस के कार्यकाल में पाक-बांग्लादेश के बीच दोस्ती इतनी बढ़ गई कि पाकिस्तान चिकन नेक एरिया के 20 किमी के आसपास एयरफील्ड एरिया का निर्माण करना चाहता था। वो उन्हें ड्रोन और टैंकर देना चाहते थे। हालांकि, बांग्लादेश को अब एहसास हो गया है कि भारत काफी पास है और पाकिस्तान हजारों मील दूर है। अगर कोई परेशानी होती है, तो भारत सबसे पहले मदद के लिए आगे आएगा।

उन्होंने बांग्लादेश-चीन संबंध को लेकर कहा कि वो चीन के साथ रणनीतिक संबंध चाहते हैं। वो इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए चीन का इस्तेमाल करना चाहते हैं। भारत के राजदूत के साथ पीएम रहमान की मुलाकात के अलावा रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख पराग जैन ने भी उनसे मुलाकात की। इसलिए मुझे लगता है कि यहां कई मुद्दों पर बात हुई है, जो रणनीतिक और सुरक्षा की दृष्टि से हैं।

सहगल ने कहा, “चीन की आदत है कि वह अरुणाचल प्रदेश में जगहों, खासकर पहाड़ी दर्रों, झीलों और दूसरी स्ट्रेटेजिक रूप से जरूरी जगहों के नाम बदलकर उन्हें चीनी नाम देता है। उसका मानना है कि भविष्य में जब बॉर्डर विवादों पर बात होगी और उन्हें सुलझाया जाएगा, तो ये चीनी दावे और मजबूत हो जाएंगे। भारत ने एक नया मैप भी जारी किया है जिसमें दर्रों और झीलों समेत 27 जरूरी जगहों को भारतीय नाम दिए गए हैं।”

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