जेम स्टोन पार्क के उद्यमियों का सवाल—2015 में समाधान, 2023 में नई योजना, फिर 2026 में डिफॉल्टर क्यों?
जयपुर। सांगानेर-बी टू बाईपास के बीच करीब 105 एकड़ की बेशकीमती जमीन पर जेम स्टोन पार्क के करीब चार दशक पुराने उद्यमियों का संघर्ष अब PMO तक पहुंच गया है। आरोप है कि वर्षों से समाधान का इंतजार कर रहे उद्यमियों को अब उनकी ही यूनिट्स से बेदखली का सामना करना पड़ रहा है।
करीब 1986-89 में 450 से अधिक MSME यूनिट्स के लिए विकसित किए गए इस पार्क में उद्यमियों ने अपनी पूंजी लगाकर कारोबार शुरू किया, लेकिन सड़क, पानी, बिजली, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा जैसी सुविधाओं के अभाव में पार्क विवादों में घिरता गया।
2015 में RIICO ने निकाला था रास्ता
17 दिसंबर 2015 की IDC बैठक में DGDC के 29 existing sub-lessees को accommodate करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद 2023 में Plot No. 17 (9,332 वर्गमीटर) पर Flatted Complex की योजना बनी। प्रस्ताव में पुराने 29 उद्यमियों के लिए 90-90 वर्गमीटर के मॉड्यूल और Gems & Jewellery manufacturing के लिए पहला टावर रखने की बात दर्ज थी।
लेकिन 2026 में तस्वीर पलट गई!
उद्यमियों का आरोप है कि 21 जून 2026 को Neelkanth यूनिट को बिना पूर्व सूचना ध्वस्त कर दिया गया। करीब 24 इकाइयों पर demolition कार्रवाई का भी आरोप है। वहीं 30 जुलाई 2026 के आदेश में कुछ उद्यमियों को 30 अगस्त तक यूनिट खाली करने को कहा गया है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जिस समाधान का रास्ता RIICO ने खुद बनाया था, उसी प्रक्रिया के बीच पुराने उद्यमी अब कब्जाधारी या डिफॉल्टर कैसे हो गए?
करोड़ों की जमीन पर बड़ी परियोजनाओं की नजर?
इसी क्षेत्र में पहले Fintech Park और Unity Mall जैसी योजनाओं की चर्चा रही है। अब करीब ₹5,800 करोड़ की Rajasthan Mandapam परियोजना भी हजारों करोड़ के निवेश से जुड़ी बताई जा रही है। ऐसे में उद्यमियों का सवाल है—क्या बेशकीमती जमीन की नई परियोजनाओं की कीमत पुराने उद्योगों को चुकानी पड़ेगी?
37 साल का इंतजार… 2015 का समाधान… 2023 की योजना… और 2026 में बेदखली का नोटिस—आखिर जेम स्टोन पार्क के उद्यमियों के साथ न्याय कब?
यह मामला अब सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि सैकड़ों उद्यमियों की वर्षों की पूंजी, रोजी-रोटी और सरकारी वादों की विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है।
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