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Indian Oil is offering the chance to win the SUV, will have to fill only Rs 400 oil

केंद्र ने 1 सितंबर से डीजल पर निर्यात शुल्क और विंडफॉल टैक्स घटाया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 1 सितंबर से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के शुल्क ढांचे में संशोधन किया है। इसके तहत डीजल पर निर्यात शुल्क और विंडफॉल टैक्स दोनों में कटौती की गई है।

डीजल पर निर्यात शुल्क को 3 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 1 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर लगाया जाने वाला विंडफॉल टैक्स 24 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 19 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है।

संशोधित शुल्क ढांचा 1 सितंबर से प्रभावी हो गया है और इससे पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यातकों की लागत संरचना में बदलाव आने की उम्मीद है।

इन बदलावों से भारत से डीजल निर्यात करने वाली कंपनियों को राहत मिल सकती है और उन पर कर का बोझ पहले के मुकाबले कम हो सकता है।

सरकार अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और घरेलू बाजार की परिस्थितियों में बदलाव के अनुरूप पेट्रोलियम उत्पादों पर शुल्क और विंडफॉल टैक्स की समय-समय पर समीक्षा करती है।

उदाहरण के लिए किसी वस्तु की अंतरराष्ट्रीय कीमत अचानक बढ़ जाती है, जिससे उसके उत्पादकों या विक्रेताओं को सामान्य से काफी अधिक मुनाफा होने लगता है। ऐसे अतिरिक्त मुनाफे पर सरकार द्वारा लगाया जाने वाला अतिरिक्त कर विंडफॉल टैक्स कहलाता है।

सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर यह कर इसलिए लगाती है ताकि रिफाइनर केवल अधिक मुनाफा कमाने के लिए पेट्रोल, डीजल या एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) को विदेशी बाजारों में भेजने के लिए प्रेरित न हों। अधिक कर निर्यात को कम आकर्षक बनाता है और घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने में मदद कर सकता है।

सरकार वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों, निर्यात मार्जिन और घरेलू ईंधन आपूर्ति जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए इन कर दरों की समय-समय पर समीक्षा करती है।

पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर कर बढ़ने से रिफाइनरों के लिए निर्यात की लागत बढ़ जाती है। यदि रिफाइनर इस अतिरिक्त कर बोझ को विदेशी खरीदारों पर डालने में असमर्थ रहते हैं, तो उनका प्रति लीटर मुनाफा घट सकता है।

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