गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि उनकी पर्सनल सैलरी से 5 लाख रुपए का मुआवजा वसूला जाए और वो मुआवजा डीयू की स्टूडेंट आकृति चौधरी को दिया जाए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीयू की छात्रा आकृति चौधरी की एनएसए के तहत हिरासत को गैरकानूनी बताया था।
दरअसल, अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के आंदोलन के दौरान आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन पर एनएसए लगा दिया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन में कथित भूमिका को लेकर आकृति चौधरी पर एनएसए लगाए जाने के फैसले की कड़ी आलोचना की थी। अदालत ने हिरासत के आधार को सिर्फ अनुमान पर आधारित और पर्याप्त सामग्री के अभाव वाला पाया था।
कोर्ट ने कहा था कि 5 लाख रुपए का मुआवजा उनकी हिरासत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की सैलरी से वसूला जाए। इसमें गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम और अन्य अधिकारी शामिल हैं। हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई को “उपहास के योग्य” बताते हुए संबंधित अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में अदालत की नाराजगी दर्ज करने का भी निर्देश दिया था।
इससे पहले 9 सितंबर को आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया था।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई सूर्यकांत की बेंच को बताया था कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल की जाएगी। अब राज्य सरकार के बाद नोएडा डीएम ने भी इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
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