अकेले कारोबार चलाने वाले (सोल प्रोप्राइटर) क्रेडिट ग्रोथ को आगे बढ़ा रहे हैं, उनका पोर्टफोलियो 19.3% बढ़ा है, जबकि पीएआर 91-180 एक साल पहले के 1.5% से सुधरकर 1.2% हो गया है
मुंबई. भारत का स्मॉल बिजनेस सेक्टर लगातार ज़बरदस्त मज़बूती और बढ़ती आर्थिक अहमियत दिखा रहा है। इसे क्रेडिट तक बढ़ती पहुँच, क्रेडिट की बेहतर क्वालिटी और उधार लेने वाले सभी वर्गों में बढ़ते औपचारिककरण (फॉर्मलाइज़ेशन) का समर्थन मिल रहा है। सीआरआईएफ क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड और स्मॉल इंडस्ट्रीज़ डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) ने जून 2026 के डेटा पर आधारित ‘सीआरआईएफ-सिडबी स्मॉल बिजनेस स्पॉटलाइट रिपोर्ट’ (सितंबर 2026) का पाँचवाँ संस्करण जारी किया है।
नवीनतम संस्करण इस बात पर प्रकाश डालता है कि स्मॉल बिजनेस क्रेडिट इकोसिस्टम ने एक अहम् पड़ाव पार कर लिया है। जून 2026 तक बकाया पोर्टफोलियो 50 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है, जो लोन देने की गतिविधि और उधार लेने वालों की भागीदारी में लगातार तेज़ी को दर्शाता है। इस ग्रोथ में अकेले कारोबार चलाने वालों (सोल प्रोप्राइटर) की मुख्य भूमिका रही है, जो क्रेडिट की माँग को बढ़ा रहे हैं, जबकि लोन न चुकाने (डेलिंक्वेंसी) के संकेतकों में सुधार इस सेक्टर में मज़बूत होते रिस्क प्रोफाइल को दर्शाता है।
इस पृष्ठभूमि में, राजस्थान इस संस्करण के लिए ‘स्टेट इन फोकस’ (मुख्य राज्य) के रूप में उभरा है, जो एक गतिशील और तेज़ी से विविधतापूर्ण होते स्मॉल बिज़नेस इकोसिस्टम को प्रदर्शित करता है। स्मॉल बिज़नेस क्रेडिट बकाया में साल-दर-साल 16.8% की वृद्धि हुई है, जो 14.9% की राष्ट्रीय विकास दर से अधिक है। यह राज्य अपने उद्यमिता आधार की मज़बूती को दर्शाता है, जिसे अनुकूल नीतिगत माहौल, मज़बूत एमएसएमई गतिविधि और अच्छे क्रेडिट प्रदर्शन का समर्थन प्राप्त है। जैसे-जैसे भारत समावेशी आर्थिक विकास की दिशा में प्रयास तेज़ कर रहा है, ये निष्कर्ष स्थापित और उभरते हुए दोनों बाज़ारों में रोज़गार, स्थानीय आर्थिक विकास और क्रेडिट विस्तार को आगे बढ़ाने में छोटे व्यवसायों की अहम् भूमिका को रेखांकित करते हैं।
मुख्य बातें:
- • जून 2026 में भारत का छोटे व्यवसायों का क्रेडिट पोर्टफोलियो 50.9 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। इसमें साल-दर-साल 14.9% और तिमाही-दर-तिमाही 3.5% की बढ़ोतरी हुई, जो बिजनेस क्रेडिट के लगातार औपचारिक होने और फाइनेंसिंग की मज़बूत मांग को दिखाता है।
- • इस बढ़ोतरी में अकेले कारोबार चलाने वालों (सोल प्रोप्राइटर) की अहम् भूमिका रही; उनके पोर्टफोलियो में साल-दर-साल 19.3% का विस्तार हुआ, जबकि एक्टिव लोन में 27.4% की बढ़ोतरी हुई। पोर्टफोलियो आउटस्टैंडिंग की तुलना में एक्टिव लोन में तेज़ी से हुई बढ़ोतरी क्रेडिट तक पहुँच के विस्तार का संकेत देती है।
- • पूरे पोर्टफोलियो की एसेट क्वालिटी मज़बूत बनी रही; पीएआर 91-180 जून 2025 के 1.5% से सुधरकर जून 2026 में 1.2% हो गया।
- • उद्यमों में, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर उधार लेने वालों के वर्ग में मुख्य बना रहा; कुल पोर्टफोलियो आउटस्टैंडिंग में इसकी हिस्सेदारी 41.92% रही और इसमें 3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- • बहुत कम जोखिम और कम जोखिम वाले उद्यमों के एक्सपोज़र की हिस्सेदारी जून 2024 के 66.4% से बढ़कर जून 2026 में 70.9% हो गई। अकेले कारोबार चलाने वालों के लिए, यह हिस्सेदारी मामूली रूप से 55.1% से बढ़कर 56.1% हो गई, जबकि बहुत ज़्यादा जोखिम वाला एक्सपोज़र 17.4% से बढ़कर 20.0% हो गया, जो जोखिम की लगातार निगरानी और उसे सही स्तर पर रखने की ज़रूरत को रेखांकित करता है।
राजस्थान पर फोकस
- • राजस्थान भारत के मज़बूत प्रदर्शन करने वाले छोटे व्यवसाय क्रेडिट बाज़ारों में से एक के रूप में उभरा है। इसे विविध अर्थव्यवस्था, 53 लाख से ज़्यादा रजिस्टर्ड उद्यमों के बड़े एमएसएमई आधार और औद्योगिक व एमएसएमई-केंद्रित पहलों के ज़रिए लगातार नीतिगत समर्थन का लाभ मिला है।
- • जून 2026 में राज्य का छोटे व्यवसायों का क्रेडिट पोर्टफोलियो 3.4 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जो राष्ट्रीय पोर्टफोलियो का 6.8% है। इसमें साल-दर-साल 16.8% की बढ़ोतरी हुई, जो 14.9% की राष्ट्रीय विकास दर से ज़्यादा है।
- • राजस्थान का पोर्टफोलियो विकास औसत से बेहतर रहा है और PAR 91-180 का आंकड़ा 0.9% है। रिस्क-रिटर्न के नज़रिए से यह बड़े राज्यों के बेहतर प्रदर्शन करने वाले लोन पोर्टफोलियो में से एक है।
- • राजस्थान के एंटरप्राइज़ एक्सपोज़र में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा 45.4% था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह लगभग 42% है। सर्विस सेक्टर में सबसे ज़्यादा तेज़ी देखी गई, जिसमें साल-दर-साल 15.6% की बढ़ोतरी हुई।
- • सीकर और नागौर जैसे उभरते ज़िलों में विकास दर राज्य के औसत से काफ़ी ज़्यादा रही, जिससे पता चलता है कि विकास अब स्थापित केंद्रों से आगे बढ़कर ज़्यादा जगहों पर फैल रहा है।
- • राजस्थान के एंटरप्राइज़ पोर्टफोलियो में उधार लेने वालों की प्रोफाइल राष्ट्रीय औसत से बेहतर है; यहाँ 77.3% एक्सपोज़र कम जोखिम वाली कैटेगरी में है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 70.9% है।
- • राजस्थान के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में, मशीनरी और इक्विपमेंट सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली इंडस्ट्री के तौर पर उभरी है, जिसमें पोर्टफोलियो विकास के साथ-साथ लोन न चुकाने (डेलिंक्वेंसी) के मामलों में भी सुधार हुआ है।
ये नतीजे भारत के छोटे बिज़नेस इकोसिस्टम की बढ़ती मज़बूती और लचीलेपन को दिखाते हैं। पोर्टफोलियो का बकाया 50 लाख करोड़ रुपए के आँकड़े को पार कर गया है और क्रेडिट की माँग भी मज़बूत बनी हुई है, खासकर अकेले बिज़नेस चलाने वालों (सोल प्रोप्राइटर) के बीच। इस सेक्टर को क्रेडिट की बेहतर पहुँच और पोर्टफोलियो की बेहतर क्वालिटी का फायदा मिल रहा है। राजस्थान विकास के मुख्य बाज़ारों में से एक के तौर पर उभरा है, जहाँ क्रेडिट विकास दर राष्ट्रीय औसत से ज़्यादा रही है और लोन न चुकाने (डेलिंक्वेंसी) का स्तर भी ठीक-ठाक बना हुआ है। जैसे-जैसे औपचारिक अर्थव्यवस्था (फॉर्मलाइज़ेशन) तेज़ी पकड़ रही है और नए बिज़नेस केंद्रों तक क्रेडिट की पहुँच बढ़ रही है, छोटे बिज़नेस का सेक्टर और भी अहम् भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
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