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Thyroid nodule vs. neck lump: When should you be alert?

थायरॉयड नोड्यूल बनाम गर्दन की गांठ: कब हो जाना चाहिए सतर्क?

विश्व हेड एंड नेक कैंसर दिवस 27 जलाई 2026

 

डॉ. जितेन्द्र शर्मा, कंसल्टेंट – सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल, जयपुर

 

जयपुर. गर्दन में कोई छोटी-सी गांठ या हल्की सूजन दिखाई देने पर अधिकांश लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। यदि इससे तुरंत दर्द न हो, तो अक्सर लोग इसे सूजी हुई ग्रंथि, हल्के गले के संक्रमण या अस्थायी समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। व्यस्त दिनचर्या के बीच डॉक्टर से परामर्श लेना भी अक्सर टलता रहता है। लेकिन यह समझना बेहद जरूरी है कि गर्दन की हर गांठ सामान्य या हानिरहित नहीं होती, खासकर ऐसे समय में जब देश में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है।

 

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुमान के अनुसार, इस वर्ष भारत में 15.3 लाख से अधिक नए कैंसर मामलों के सामने आने की संभावना है। देश में सिर और गर्दन के कैंसर सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में शामिल हैं, जिनका सबसे बड़ा कारण तंबाकू का सेवन है।

 

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल होता है कि थायरॉयड नोड्यूल और सामान्य गर्दन की गांठ में क्या अंतर है। थायरॉयड नोड्यूल, थायरॉयड ग्रंथि के भीतर बनने वाली एक विशेष प्रकार की गांठ होती है। थायरॉयड एक तितली के आकार की ग्रंथि है, जो गर्दन के निचले हिस्से में श्वासनली (विंडपाइप) के सामने स्थित होती है। उम्र बढ़ने के साथ थायरॉयड संबंधी समस्याएं अधिक सामान्य हो जाती हैं, लेकिन अधिकांश थायरॉयड नोड्यूल पूरी तरह सौम्य (बेनाइन) होते हैं। कई बार ये किसी अन्य कारण से कराए गए नियमित गर्दन के अल्ट्रासाउंड के दौरान संयोगवश पता चलते हैं।

 

वहीं, गर्दन की सामान्य सूजन कई अलग-अलग कारणों से हो सकती है। यह किसी संक्रमण के कारण बढ़ी हुई लिम्फ नोड, द्रव से भरी सिस्ट, लार ग्रंथि का सौम्य ट्यूमर या सिर एवं गर्दन के किसी घातक (मैलिग्नेंट) ट्यूमर का संकेत भी हो सकती है। हालांकि अधिकांश गांठें कैंसरयुक्त नहीं होतीं, फिर भी सही कारण जानने और किसी गंभीर बीमारी को समय रहते पहचानने के लिए विशेषज्ञ से जांच कराना आवश्यक है।

 

एक सामान्य चिकित्सकीय नियम के अनुसार, यदि गर्दन की कोई सूजन दो सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे या लगातार आकार में बढ़ती जाए, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। विशेष रूप से यदि इसके साथ लगातार आवाज बैठना या आवाज में बदलाव, निगलने में दर्द या कठिनाई, मुंह के भीतर ऐसा घाव जो लंबे समय तक ठीक न हो, बिना कारण कान में दर्द या लार में खून दिखाई दे, तो इन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि आपको निश्चित रूप से कैंसर है, लेकिन ये ऐसे चेतावनी संकेत हैं जिनकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

 

भारत में सिर और गर्दन के कैंसर के मामलों में तंबाकू सबसे प्रमुख जोखिम कारक है। चबाने वाला तंबाकू, गुटखा और खैनी सीधे तौर पर मुंह और गले के कैंसर से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा अत्यधिक शराब का सेवन इस जोखिम को और बढ़ा देता है। हाल के वर्षों में गले के कैंसर के स्वरूप में भी बदलाव देखा जा रहा है। अब ये कैंसर धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) संक्रमण के कारण बढ़ते हुए पाए जा रहे हैं।

 

सकारात्मक बात यह है कि आधुनिक ऑन्कोलॉजी में अब अत्यंत सटीक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। हाई-रिजॉल्यूशन अल्ट्रासाउंड, फ्लेक्सिबल एंडोस्कोपी, सीटी स्कैन जैसी उन्नत इमेजिंग तकनीकों और फाइन-नीडल बायोप्सी की मदद से गर्दन की गांठ की प्रकृति का तेजी और सटीकता से पता लगाया जा सकता है। यदि कैंसर का शुरुआती चरण में ही पता चल जाए, तो उपचार की सफलता और मरीज के जीवित रहने की संभावना दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

 

अधिकांश गर्दन की गांठें अंततः पूरी तरह सौम्य साबित होती हैं। इसलिए समय पर जांच कराने से या तो आपको पूरी तरह मानसिक संतोष मिलेगा या फिर आवश्यकता होने पर सही समय पर उचित उपचार मिल सकेगा। अब समय आ गया है कि गर्दन की छोटी-छोटी गांठों या सूजन को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते चिकित्सकीय जांच कराई जाए। याद रखें, समय पर उठाया गया कदम ही आपकी सबसे प्रभावी सुरक्षा है।

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