शुक्रवार, मई 15 2026 | 08:59:58 PM
Breaking News
Home / स्वास्थ्य-शिक्षा / बायोकॉन की सोराइसिस दवा की बिक्री में इजाफा
Biocon's psoriasis drug sales increase

बायोकॉन की सोराइसिस दवा की बिक्री में इजाफा

जयपुर। त्वचा रोग सोराइसिस (psoriasis) में इस्तेमाल होने वाली बायोकॉन की दवा इटोलिजुमैब (covid-19 drug itolizumab) को जब से दवा नियामक द्वारा कोविड-19 (Covid-19) में आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिली है, तब से उसकी बिक्री में सात गुना इजाफा हो चुका है। हालांकि इस दवा को अभी स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health) के कोविड-19 (Covid-19) के इलाज के चिकित्सा प्रबंधन नियमों का हिस्सा नहीं बनाया गया है।

चौथे चरण के चिकित्सकीय परीक्षण

विशेषज्ञों का मानना है कि इस दवा पर (covid-19 drug itolizumab) चौथे चरण के चिकित्सकीय परीक्षण चल रहे हैं, इसलिए अगर कोविड-19 (Covid-19) के मरीजों पर दवा के इस्तेमाल के नतीजे अनुकूल आए तो इसकी बिक्री और बढ़ सकती है। बाजार अनुसंधान कंपनी एआईओसीडी एडब्ल्यूएसीएस के आंकड़े दर्शाते हैं कि इस दवा को जुलाई में मंजूरी मिलने के समय इसकी बिक्री महज 50 यूनिट थी, जो अगस्त में सात गुना बढ़कर 350 यूनिट हो गई। जून में इस दवा की कोई बिक्री नहीं दिखी।

एक मरीज के इलाज में लगेंगे 32000 रुपए

भारत में इटोलिजुमैब (covid-19 drug itolizumab) को अलजुमैब ब्रांड (Aljumab brand) के नाम से जाना जाता है। इसकी कीमत 8,000 रुपये प्रति शीशी है। ज्यादातर मरीजों को चार शीशी की जरूरत होती है। इस तरह इस दवा से इलाज की कुल लागत 32,000 रुपये आती है। हालांकि कुछ मामलों में मरीज (Covid-19 Patient) को दो और शीशियों की दूसरी खुराक की जरूरत पड़ सकती है। इस दवा का बायोकॉन की बेंगलूूरु स्थित बायो-मैन्यूफैक्चरिंग इकाई में इन्ट्रावेनस इंजेक्शन के रूप में विनिर्माण होता है।

चिकित्सा प्रबंधन नियमों में शामिल नहीं

कंपनी को कोविड-19 (Covid-19) के सामान्य और गंभीर लक्षणों वाले मरीजों के आपातकालीन इलाज के लिए इस नई जैविक दवा की बिक्री की भारत के औषध महानिदेशक (डीसीजीआई) से मंजूरी जुलाई की शुरुआत में मिली थी। हालांकि इस दवा को स्वास्थ्य मंत्रालय के चिकित्सा प्रबंधन नियमों में शामिल नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि सरकार इसकी प्रभावी इलाज के रूप में सिफारिश नहीं करती है।

psoriasis drug कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल

इस दवा को कोविड-19 (Covid-19) के इलाज में इस्तेमाल करने के लिए पहले का परीक्षण उन 30 मरीजों पर किया गया, जो सार्स-सीओवी-2 संक्रमण (SARS-COV-2 infection) के कारण सामान्य से गंभीर एआरडीएस (ARDS) (एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ऑर्डर सिंड्रोम) (acute respiratory disorder syndrome) से पीडि़त थे। इन 30 मरीजों में 20 को इटोलिजुमैब दी गई और 10 को मानक इलाज मिला। जिन 20 मरीजों को इलोलिजुमैब (covid-19 drug itolizumab) दी गई, वे पूरी तरह ठीक हो गए और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। दूसरी तरफ जिन 10 अन्य मरीजों को मानक देखभाल दी गई, उनमें से तीन मर गए।

भारत में वैक्सीन का इंसानी परीक्षण शुरू

Check Also

IIT Mandi invites applications for Prayas 4.0, a one-month residential program in AI, Robotics and IoT

आईआईटी मंडी ने प्रयास 4.0 के लिए आवेदन आमंत्रित किए, एआई, रोबोटिक्स और आईओटी में एक महीने का आवासीय कार्यक्रम

मंडी: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी, भारत के प्रमुख आईआईटी में से एक, ने अपने …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *