रविवार, जुलाई 26 2026 | 12:24:55 PM
Breaking News
Home / राजकाज / भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने तय किया 1,200 किलोमीटर का सफर; 3,200 लीटर डीजल की बचत

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने तय किया 1,200 किलोमीटर का सफर; 3,200 लीटर डीजल की बचत

नई दिल्ली। भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन, जो 10-कोच मॉडल है और संचालन के दौरान केवल जलवाष्प उत्सर्जित करती है, ने सफलतापूर्वक 1,200 किलोमीटर से अधिक का सफर तय किया है। इस दौरान 3,200 लीटर से अधिक डीजल की बचत हुई। यह जानकारी रेलवे मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी।

रेलवे मंत्रालय के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया से ट्रेन के भीतर ही बिजली पैदा होती है। इस प्रक्रिया में उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है।

मंत्रालय ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया धुएं से मुक्त है और इसमें टेलपाइप कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है। यही वजह है कि इसे वर्तमान समय की सबसे स्वच्छ रेल प्रोपल्शन तकनीक माना जा रहा है।

इस ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार हैं, जो कुल 2,400 किलोवाट की शक्ति प्रदान करती हैं। इन्हें लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियों और हाइड्रोजन सिलेंडरों का भी समर्थन प्राप्त है।

ट्रेन के लिए ग्रीन हाइड्रोजन को 500 बार तक के दबाव पर संग्रहित किया गया है, जबकि 350 बार के दबाव पर इसकी आपूर्ति की जाती है। कुल मिलाकर इसमें लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन संग्रहित करने की क्षमता है।

रेलवे मंत्रालय ने बताया कि ट्रेन में कई स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियां लगाई गई हैं, जो गैस रिसाव, अत्यधिक गर्मी, आग और धुएं का तुरंत पता लगा सकती हैं। इनके साथ ऑटोमैटिक शट-ऑफ सिस्टम, लगातार वेंटिलेशन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन और सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षण भी सुनिश्चित किए गए हैं।

बयान के अनुसार, जींद और सोनीपत के बीच सफल संचालन के बाद अब जल्द ही इस ट्रेन का दिल्ली रूट पर भी ट्रायल शुरू किया जाएगा।

मंत्रालय ने कहा कि भारत की हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन ने देश में स्वदेशी हाइड्रोजन रेल इकोसिस्टम की नींव रखी है और यह टिकाऊ, शून्य-उत्सर्जन रेल परिवहन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे भविष्य में इस तकनीक के विस्तार और स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व का रास्ता भी खुलेगा।

ट्रेन के शुभारंभ के बाद केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भारत ने इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन टेक्नोलॉजी के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) राइट्स अपने पास सुरक्षित रखे हैं, जिससे भविष्य में इस तकनीक का निर्यात भी किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में भविष्य के प्रमुख ईंधन के रूप में उभर रहा है और भारतीय रेलवे इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कर रहा है।

अश्विनी वैष्णव ने कहा, “रेलवे ने परिवहन क्षेत्र के लिए पूरी तरह स्वदेशी 2,400 किलोवाट क्षमता वाला हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम विकसित किया है, जिसे इस ट्रेन में लगाया गया है। यह तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार करती है।”

Check Also

Railway overbridge to be built in Bharatpur - Approval of Rs 73.34 crore for construction

देशभर में 10,389 किलोमीटर के नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोर आवंटित; 4,809 किलोमीटर पर निर्माण पूरा:  केंद्र

नई दिल्ली. देशभर में अब तक 10,389 किलोमीटर के नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोर और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *