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भारत टेक्स 2026 बना भारतीय टेक्सटाइल उद्योग का वैश्विक मंच, मिले 14,300 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव

नई दिल्ली। भारत के प्रमुख टेक्सटाइल प्रदर्शनी कार्यक्रम भारत टेक्स 2026 के तीसरे संस्करण में 130 से अधिक देशों के 6,000 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और करीब 1.30 लाख व्यापारिक आगंतुकों ने हिस्सा लिया। सरकार के अनुसार, इस आयोजन ने भारतीय पारंपरिक कला और टेक्सटाइल उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, 1.6 मिलियन वर्ग फुट क्षेत्र में आयोजित इस प्रदर्शनी में 20,000 से अधिक टेक्सटाइल उत्पाद प्रदर्शित किए गए। यह आयोजन भारतीय विरासत, उद्योग, सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) और वैश्विक व्यापार का प्रमुख मंच बनकर उभरा।

इस प्रदर्शनी में फाइबर, यार्न, फैब्रिक, अपैरल, होम टेक्सटाइल्स, टेक्निकल टेक्सटाइल्स, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट्स सहित पूरे टेक्सटाइल वैल्यू चेन को शामिल किया गया।

आयोजन में बिहार की प्रसिद्ध टिकुली आर्ट भी आकर्षण का केंद्र रही, जो अपनी चमकदार रंगों और बारीक इनामेल वर्क के लिए जानी जाती है।

वहीं, करीब 120 बुनकरों का प्रतिनिधित्व करने वाली निर्यातक हैंडलूम कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड ने हैंडलूम एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल की ओर से उपलब्ध कराए गए रियायती स्टॉल के माध्यम से अपने घरेलू स्तर पर तैयार किए जाने वाले हैंडलूम उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने पेश किया।

इस आयोजन में भारत और विदेशों से प्रदर्शकों, खरीदारों, निवेशकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जो भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर में बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाता है। प्रदर्शनी में 1,600 से अधिक प्रदर्शक और 11,000 से ज्यादा खरीदार शामिल हुए।

इस दौरान 28,000 से अधिक बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) बैठकें आयोजित हुईं। साथ ही 100 से अधिक गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट (जी2जी) और बिजनेस-टू-गवर्नमेंट (बी2जी) बैठकें भी हुईं। इन बैठकों के जरिए 14,300 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।

भारत टेक्स 2026 के साथ-साथ दिल्ली स्थित नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम में आयोजित इंडी हाट 2026 ने भी भारत की हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया। इस आयोजन में 48 कारीगरों और बुनकरों के साथ 12 डिजाइन आधारित ब्रांड्स ने भाग लिया और क्षेत्रीय हस्तशिल्प को प्रमुखता से प्रस्तुत किया।

प्रदर्शनी में गुलाबी मीनाकारी, डोकरा, उस्ता कला, पिचवाई, सोजनी एम्ब्रॉयडरी, ब्लू पॉटरी, सिल्वर फिलिग्री, चेरियाल पेंटिंग, माता नी पछेड़ी, पेपियर-माशे, बागरू ब्लॉक प्रिंटिंग, जामदानी साड़ियां, मूगा और एरी सिल्क, ओडिशा इकत समेत कई पारंपरिक भारतीय कला और शिल्प रूपों का प्रदर्शन किया गया।

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