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5जी यूज़-केस लैब की समीक्षा और भारत के 6जी अनुसंधान को गति देने हेतु डॉट प्रतिनिधिमंडल का आईआईटी मंडी दौरा

मंडी. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी (आईआईटी मंडी) ने दूरसंचार विभाग (डॉट), शिमला के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की आधिकारिक यात्रा की मेज़बानी की. इस दौरान उन्नत दूरसंचार के क्षेत्र में संस्थान की शैक्षणिक, अनुसंधान और जनसंपर्क पहलों की समीक्षा की गई। विशेष रूप से डॉट की प्रमुख पहल के अंतर्गत स्थापित 5जी यूज़- केस लैब की प्रगति एवं उपयोग का आकलन किया गया तथा संचार मित्र विद्यार्थियों से संवाद किया गया।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अनिल कुमार गुप्ता, अतिरिक्त महानिदेशक दूरसंचार (एडिशनल डीजीटी) एवं हिमाचल प्रदेश लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (एलएसए) के सलाहकार, डॉट ने किया। उनके साथ संदीप आर्य, उप महानिदेशक (प्रौद्योगिकी) तथा रमेश कुमार, सहायक निदेशक (प्रौद्योगिकी) उपस्थित रहे।

 

टीम ने आईआईटी मंडी के नेतृत्व, स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (एससीईई) के संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों से संवाद किया तथा 5जी एवं उभरते 6जी अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के अंतर्गत चल रही गतिविधियों और तकनीकी अवसंरचना की समीक्षा की।

एससीईई के सहायक प्रोफेसर, 5जी यूज़-केस लैब एवं संचार मित्र कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. आदर्श पटेल ने संकाय और विद्यार्थियों की सहभागिता से संचालित लैब की शैक्षणिक एवं अनुसंधान पहलों की जानकारी प्रतिनिधिमंडल को दी।

इस अवसर पर आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा, “आईआईटी मंडी में हम अगली पीढ़ी के संचार अनुसंधान को वैज्ञानिक दायित्व के साथ-साथ राष्ट्रीय दायित्व के रूप में देखते हैं। दूरसंचार विभाग के साथ हमारा सहयोग हमें 5जी, 6जी और दीर्घकालिक डिजिटल आत्मनिर्भरता के लिए भारत की प्राथमिकताओं के अनुरूप कठोर अकादमिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाता है।” चर्चाओं में उभरती प्रौद्योगिकियों के त्वरित अंगीकरण के लिए सरकार, शिक्षा जगत, स्टार्टअप्स और युवाओं के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने के महत्व पर बल दिया गया।

अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में 5जी यूज़-केस लैब विद्यार्थियों में 5जी प्रौद्योगिकियों से जुड़ी दक्षताओं के निर्माण तथा वास्तविक 5जी परिवेश में कार्य करने के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित की गई हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ये लैब स्टार्टअप्स, एमएसएमई और उद्योग हितधारकों के लिए भी सुलभ हैं, जो उद्योग-अकादमिक सहयोग और नवाचार-आधारित विकास के प्रति डॉट की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

संकाय स्तर की चर्चाएँ भारत के 6जी विज़न को सुदृढ़ अकादमिक अनुसंधान के माध्यम से आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहीं। एससीईई के अध्यक्ष डॉ. आदित्य निगम, डॉ. आदर्श पटेल और डॉ. पवन रेड्डी ने शैक्षणिक परियोजनाओं, नवाचार और वास्तविक दुनिया में लागू होने योग्य 5जी यूज़-केस के समर्थन में लैब की भूमिका को रेखांकित किया तथा भविष्य की 6जी प्रणालियों के लिए एंड-टू-एंड स्वदेशी प्रौद्योगिकी स्टैक की आवश्यकता पर जोर दिया।

संकाय सदस्यों ने दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि (टीटीडीएफ) जैसी पहलों के अंतर्गत डॉट और सी-डॉट के साथ सहयोग की जानकारी भी साझा की। बीते एक वर्ष में डॉ. आदर्श पटेल और डॉ. राहुल श्रेष्ठा सहित शोधकर्ताओं ने अगली पीढ़ी के दूरसंचार अनुसंधान के लिए ₹4 करोड़ से अधिक की फंडिंग प्राप्त की है।

प्रतिनिधिमंडल ने संचार मित्र विद्यार्थियों से भी संवाद किया, जो संचार साथी जैसे नागरिक-केंद्रित डॉट सेवाओं के प्रति जागरूकता फैलाने, डिजिटल धोखाधड़ी, ऑनलाइन ठगी और शिकायत निवारण से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उनके जनसंपर्क और सामुदायिक प्रभाव की सराहना करते हुए प्रतिनिधिमंडल ने उत्कृष्ट सेवा के लिए टीम को सम्मानित किया।

समग्र रूप से, यह यात्रा दूरसंचार सुरक्षा को सुदृढ़ करने, ग्रामीण कनेक्टिविटी बढ़ाने तथा डिजिटल इंडिया, विकसित भारत और भारत 6जी विज़न सहित राष्ट्रीय पहलों को आगे बढ़ाने में डॉट के साथ आईआईटी मंडी के सशक्त संरेखण को रेखांकित करती है।

 

आईआईटी मंडी के बारे में:

आईआईटी मंडी देश के दूसरे चरण के शीर्ष IIT संस्थानों में से एक है, जो हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के

कमांड घाटी में स्थित है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्थापित आठ नए IIT में

से एक, यह संस्थान राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है। संस्थान का स्थायी परिसर

मंडी शहर से लगभग 14 किलोमीटर दूर स्थित है और यह उत्तर और दक्षिण कैंपस में विभाजित है।

अपने स्थापना काल से ही संस्थान ने ₹120 करोड़ से अधिक की लागत वाले 275 से अधिक अनुसंधान

एवं विकास (R&D) परियोजनाओं पर काम किया है। विगत वर्षों में संस्थान ने 11 अंतरराष्ट्रीय और 12

राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

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