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Institutional investment in Indian real estate sector to cross $10 billion in 2025: Report

भारत का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मई में बढ़कर 55 पर पहुंचा, नए ऑर्डरों और उत्पादन में मजबूत वृद्धि

नई दिल्ली। एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई के सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) मई में बढ़कर 55.0 पर पहुंच गया, जो कि अप्रैल के 54.7 और शुरुआती अनुमान 54.3 से अधिक है। इसका मुख्य कारण खरीद गतिविधियों, नए ऑर्डरों और उत्पादन में अप्रैल की तुलना में तेज वृद्धि रहा, जिसके चलते कंपनियों ने स्टॉक जमा करना भी बढ़ा दिया।

मई के आंकड़ों से पता चला कि भारत के विनिर्माण उद्योग में वृद्धि लगभग 10 दिन पहले जारी किए गए शुरुआती अनुमानों की तुलना में अधिक मजबूत रही।

वहीं, कच्चे माल और खरीद लागत में बढ़ोतरी अप्रैल 2022 के बाद दूसरी सबसे तेज गति से दर्ज की गई। केवल अप्रैल 2026 में इससे अधिक वृद्धि देखी गई थी। हालांकि, तैयार उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की दर पिछले एक वर्ष के औसत से कम रही।

अंतिम पीएमआई आंकड़े बताते हैं कि मई में विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति पिछले तीन महीनों में सबसे अधिक मजबूत हुई है।

एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा कि भारत का अंतिम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई संकेत देता है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कंपनियों ने एहतियात के तौर पर स्टॉक बढ़ाना जारी रखा है। उत्पादन वृद्धि में तेजी आई है, जबकि खरीद गतिविधियां और तैयार माल का भंडार भी तेज गति से बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि नए ऑर्डरों में वृद्धि मुख्य रूप से घरेलू मांग की वजह से हुई, जबकि निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि दर कुछ धीमी पड़ी है।

भंडारी के अनुसार, कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी की रफ्तार मई में थोड़ी कम हुई, जबकि तैयार उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी और अधिक धीमी हो गई। इससे निर्माताओं के लाभ मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

पीएमआई आंकड़ों से यह भी पता चला कि वस्तुओं का उत्पादन करने वाली कंपनियों में नए ऑर्डर और उत्पादन दोनों की वृद्धि फरवरी के बाद सबसे तेज रही।

इन दोनों मामलों में इंटरमीडिएट और कैपिटल गुड्स श्रेणियों में वृद्धि उपभोक्ता वस्तु निर्माताओं की तुलना में अधिक मजबूत रही। सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने इस तेजी का कारण मजबूत मांग, बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और नए कारोबारी अवसरों को बताया।

विस्तृत आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि घरेलू बाजार ने वृद्धि को सबसे अधिक समर्थन दिया, जबकि नए निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि दर कुछ नरम रही।

फिर भी अंतरराष्ट्रीय बिक्री में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। कंपनियों ने एशिया, यूरोप, केन्या, नाइजीरिया और पश्चिम एशिया से मिले नए ऑर्डरों को इसका प्रमुख कारण बताया।

कीमतों के मोर्चे पर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर लागत पर दबाव के रूप में जारी रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों ने ऊर्जा, ईंधन, कच्चे माल और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी की जानकारी दी। पिछले 45 महीनों में इनपुट लागत में इससे अधिक तेज वृद्धि केवल अप्रैल 2026 में दर्ज की गई थी।

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