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पीएलआई में ज्यादा धन की मांग

नई दिल्ली: सरकार के प्रमुख विभागों जैसे कि फार्मास्युटिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत अतिरिक्त रकम की मांग की है क्योंकि इस योजना को उद्योगों की ओर से उम्मीद से बेहतर प्रतिक्रिया मिली है। साथ ही विभाग देश में विनिर्माण को और बढ़ावा देना चाहते हैं। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली सचिवों की अधिकार प्राप्त समिति जल्द ही इन मांगों पर विचार कर सकती है।

नीति आयोग के मुख्य कार्याधिकारी अमिताभ कांत ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवद्र्घन विभाग (डीपीआईआईटी) और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों की एक समिति इन मांगों का अध्ययन कर रही है और इस पर विचार कर रही है कि दूसरी पीएलआई योजनाओं में इसतेमाल नहीं की गई राशि इन विभागों को बांटी जा सकती है या नहीं।

उन्होंने कहा कि पीएलआई योजना के तहत सरकार के पास कुल 11,484 करोड़ रुपये बचे हैं। बची राशि उन सरकारी विभागों को आंवटित की जा सकती है, जिन्हें अतिरिक्त पैसे की जरूरत है। पीएलआई योजना तैयार करते समय इस बारे में प्रावधान भी किया गया है। वाहन और वाहन कलपुर्जा क्षेत्र के पीएलआई बजट में उल्लेखनीय कमी से भी बचत हुई है। बीते समय में सरकार ने आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई योजना के अंतर्गत 5,000 करोड़ रुपये प्रोत्साहन की घोषणा की थी, जो अंतिम आवंटन से 2,350 करोड़ रुपये अधिक था।

13 प्रमुख क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पीएलआई योजना के तहत 1.97 लाख करोड़ रुपये की घोषणा की थी। इन क्षेत्रों में वाहन, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल जैसे उद्योग शामिल हैं। इस योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर तैयार वस्तुओं की लागत को प्रतिस्पर्धी बनाना, रोजगार के अवसर पैदा करना, सस्ते आयात पर रोक लगाना और निर्यात को बढ़ावा देना है।

वर्तमान में पीएलआई योजना के प्रभारी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने समिति को सूचित किया है कि उसे इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, आईटी हार्डवेयर और आईओटी उपकरणों – वेयरेबल और हियरेबल के व्यापक स्तर पर उत्पादन के लिए पीएलआई योजना के तहत 22,900 करोड़ रुपये से अधिक की जरूरत है, क्योंकि सभी योजनाओं पर काम चल रहा है। हालांकि मंत्रालय के पास केवल 2,923 करोड़ रुपये का ही बजट उपलब्ध है। इस पैसे का उपयोग कंपनियों को प्रोत्साहित करने और निर्यात को बढ़ावा देने में किया जाएगा।

फार्मास्युटिकल विभाग ने टीका उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल का घरेलू स्तर पर उत्पादन के लिए फार्मास्युटिकल दवाओं में सहयोग के लिए पीएलआई योजना के तहत 3,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कोष की मांग की है। इस क्षेत्र के लिए पीएलआई के तहत 15,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसका मकसद घरेलू स्तर पर दवाओं, आईवीडी और दवाओं में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

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