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आर्थिक संघर्षों को मात दे साक्षी ने जीता केआईयूजी 2025 में 10 मीटर एयर राइफल का स्वर्ण

एनसीसी कैडेट रहते हुए साक्षी को शूटिंग की ओर आकर्षण हुआ, सुरक्षा गार्ड की बेटी साक्षी की ट्रेनिंग के लिए मां ने गिरवी रखे थे अपने गहने, ओलंपियन गगन नारंग की पुणे स्थित फाउंडेशन ने साक्षी को दिया जीवन-बदलने वाला अवसर

 

जयपुर. साक्षी पाडेकर ने जब शूटिंग को करियर के रूप में अपनाने का फैसला किया, तब बंदूक किराए पर लेना और उससे जुड़ी बुनियादी चीजें खरीदना भी एक बड़ी चुनौती थी। तो फिर इस चुनौती से निपटने और ट्रेनिंग शुरू करने के लिए उनकी मां को अपने गहने गिरवी रखने पड़े।

पुणे में एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में काम करने वाले एक सुरक्षा गार्ड की 22 वर्षीय बेटी साक्षी ने तब से लंबा सफर तय किया है। उन्होंने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स राजस्थान 2025 में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में शानदार जीत हासिल की और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी को टीम गोल्ड दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई।

 

इस उपलब्धि को और खास बनाता है कि यह उनकी पहली बड़ी 10 मीटर एयर राइफल जीत है, क्योंकि अब तक उनका मुख्य फोकस 50 मीटर राइफल इवेंट रहा था—जिसे उन्होंने नेशनल कैडेट कॉर्प्स (NCC) के दौरान अपनाया था।

साक्षी ने स्वर्ण जीतने के बाद भावुक आवाज़ में साई मीडिया से कहा। “मुझे पता था कि परफेक्ट शॉट के लिए शांत रहना बेहद जरूरी है। मैंने बस अपने लक्ष्य पर ध्यान रखा और इस दिन के लिए बहुत मेहनत की। आज वह सब रंग लाया।”

 

अलेफाटा गांव (पुणे से ढाई घंटे दूर) की रहने वाली साक्षी के माता-पिता बेहतर जीवन और बच्चों के लिए बेहतर अवसरों की तलाश में पुणे चले आए थे। साक्षी ने जूडो, ताइक्वांडो जैसे कई खेल आज़माए, लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन के बाद एक एनसीसी कैंप में उन्हें शूटिंग से लगाव हुआ। लेकिन एनसीसी कैंप के बाहर प्रोफेशनली शूटिंग जारी रखना काफी महंगा था।

 

साक्षी याद करती हैं, “मेरी प्रेरणा मेरा जुनून और मेरे माता-पिता के त्याग थे। उन्होंने हमेशा कहा कि चाहे कुछ भी हो, हार मत मानना। हम राइफल किराए पर लेते थे, जिनका किराया लगभग 40,000 रुपये प्रति माह था। साथ में गोलियों का खर्चा अलग। इसे वहन करना लगभग असंभव था, लेकिन माता-पिता ने आठ महीने तक किसी तरह व्यवस्था की। तभी गगन नारंग स्पोर्ट्स फाउंडेशन की नजर मुझ पर पड़ी और उन्होंने मुझे एक बड़ा सहारा दिया।”

 

फाउंडेशन के प्रोजेक्ट लीप के तहत दी जाने वाली स्कॉलरशिप (ने उनकी दिशा ही बदल दी। उन्होंने 2024 की महाराष्ट्र स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में 50 मीटर राइफल थ्री-पोजीशन में जूनियर और सीनियर दोनों वर्गों में स्वर्ण जीता। इसके बाद नेशनल्स में जूनियर वर्ग में रजत पदक जीता और 2024 जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप (पेरू) में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

 

साल की शुरुआत में हुई कलाई की चोट से उनका प्रशिक्षण प्रभावित हुआ, लेकिन साक्षी जयपुर में अच्छा करने के लिए दृढ़ थीं। पिछले साल गुवाहाटी में आयोजित केआईयूजी के चौथे संस्करण में वह टीम ब्रॉन्ज ही हासिल कर पाई थीं।

 

अपनी बात समाप्त करते हुए साक्षी ने कहा, “पिछले साल के खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स ने मुझे विश्वास दिया कि मैं उच्च स्तर पर प्रदर्शन कर सकती हूं। उसी आत्मविश्वास ने मुझे अन्य प्रतियोगिताओं में भी बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की। मुझे लगता है कि यहां स्वर्ण जीतना सिर्फ शुरुआत है। मैं आगे भी 10 मीटर एयर राइफल और 50 मीटर दोनों में अच्छा करने की उम्मीद करती हूं।”

 

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