New Delhi. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कर्ज वसूली (Debt Recovery) की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए ‘बैड लोन’ (NPA) की वसूली से जुड़े नए नियमों का एक मसौदा (Draft Guidelines) पेश किया है।
1. अचल संपत्तियों पर मालिकाना हक
नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई कर्जदार अपना लोन चुकाने में असमर्थ रहता है, तो बैंक और NBFCs कर्ज की वसूली के लिए गिरवी रखी गई अचल संपत्ति (Immovable Property) जैसे जमीन, मकान या व्यावसायिक बिल्डिंग को सीधे अपने कब्जे में ले सकेंगे। अब तक इस प्रक्रिया में कई कानूनी पेचीदगियां आती थीं, जिन्हें इस मसौदे के जरिए सुव्यवस्थित करने की कोशिश की गई है।
2. ‘होल्डिंग’ के लिए 7 साल की समय सीमा
RBI ने स्पष्ट किया है कि बैंक प्रॉपर्टी डीलर नहीं हैं। इसलिए, वे इन संपत्तियों को अनिश्चित काल तक अपने पास नहीं रख सकते।
- नियम: कब्जे में ली गई संपत्ति को बैंक को 7 साल के भीतर बेचना होगा।
- उद्देश्य: इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक अपना ध्यान मुख्य बैंकिंग कामकाज (Core Banking) पर रखें और उनकी बैलेंस शीट में ‘रियल एस्टेट’ का अंबार न लगे।
3. विशेष परिस्थितियों में ही अनुमति
आमतौर पर, वित्तीय संस्थानों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे केवल पैसों का लेनदेन करें। लेकिन कुछ विशेष हालातों में, जब कर्ज वसूली का कोई और रास्ता न बचे, तब ‘वसूली रणनीति’ के तौर पर संपत्ति का मालिकाना हक लेने की अनुमति दी जाएगी।
4. 26 मई तक मांगे गए सुझाव
यह वर्तमान में एक मसौदा (Draft) है। RBI ने इस पर सभी हितधारकों (Stakeholders) और आम जनता से 26 मई, 2026 तक सुझाव और प्रतिक्रियाएं मांगी हैं। इन सुझावों की समीक्षा के बाद ही अंतिम नियम लागू किए जाएंगे।
प्रमुख बिंदु एक नजर में:
| विवरण | नियम/शर्त |
| किसे लागू होगा? | सभी अनुसूचित बैंक और NBFCs |
| क्या कब्जे में ले सकते हैं? | गिरवी रखी गई जमीन, मकान या अचल संपत्ति |
| अधिकतम समय सीमा | 7 साल के भीतर बेचना अनिवार्य |
| सुझाव की अंतिम तिथि | 26 मई, 2026 |
विशेषज्ञों की राय
बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से बैंकों के NPA (Non-Performing Assets) के निपटान में तेजी आएगी। अक्सर नीलामी की प्रक्रिया में देरी होने के कारण संपत्ति की वैल्यू कम हो जाती है, लेकिन अब बैंक सीधे नियंत्रण लेकर उसे सही समय पर बाजार में बेच सकेंगे। इससे वित्तीय संस्थानों की लिक्विडिटी (नकदी प्रवाह) में सुधार होने की उम्मीद है।
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