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एमके स्टालिन ने सीएम पद से दिया इस्तीफा, राज्यपाल ने कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा

चेन्नई. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को भेज दिया।

राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनके मंत्रिपरिषद का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। साथ ही उन्होंने स्टालिन से नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में पद पर बने रहने का अनुरोध किया है।

मंगलवार को लोक भवन से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राज्यपाल ने संवैधानिक परंपरा के तहत स्टालिन से तब तक कार्यभार संभालने को कहा है, जब तक नई सरकार शपथ नहीं ले लेती।

स्टालिन का इस्तीफा हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में डीएमके नीत सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) को मिली करारी हार के बाद आया है। सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि गठबंधन बहुमत से काफी पीछे रह गया है, उसके तुरंत बाद इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया गया।

234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में डीएमके गठबंधन को केवल 73 सीटें मिलीं, जो बहुमत के 118 के आंकड़े से काफी कम है। डीएमके ने 164 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह लगभग 60 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी, जिससे पार्टी को विपक्ष में बैठना पड़ा।

चुनाव में स्टालिन को व्यक्तिगत तौर पर भी बड़ा झटका लगा है। वे 2011 से प्रतिनिधित्व कर रहे अपनी पारंपरिक कोलाथुर सीट से चुनाव हार गए। उन्हें तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने पराजित किया।

तमिलनाडु में किसी मौजूदा मुख्यमंत्री की चुनावी हार का यह दुर्लभ उदाहरण है। इससे पहले 1996 में पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता को भी हार का सामना करना पड़ा था।

वी.एस. बाबू की जीत को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह पहले डीएमके से जुड़े रहे हैं। उनकी जीत राज्य में मतदाताओं के बदलते रुझान और राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव का संकेत देती है।

इस चुनाव में अभिनेता-राजनेता विजय के नेतृत्व में तमिलगा वेत्री कझगम सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, हालांकि वह बहुमत से दूर है। ऐसे में राज्य में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

 

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