Balotra। प्रदेश के परिवहन विभाग में इन दिनों नियमों और आम जनता की सुरक्षा को ताक पर रखकर ड्राइविंग लाइसेंस बांटे जा रहे हैं। बिना किसी प्रैक्टिकल ड्राइविंग टेस्ट और बुनियादी प्रशिक्षण के धड़ल्ले से लाइसेंस जारी करने का यह खेल सड़क सुरक्षा के लिए एक बड़ा टाइम बम साबित हो सकता है। विभागीय अफसरों की घोर लापरवाही और दलालों की साठगांठ के कारण आज पूरा सरकारी सिस्टम सवालों के घेरे में है।
अफसरों के आईडी-पासवर्ड से खेल रहे एजेंट
परिवहन कार्यालयों (RTO/DTO) की कार्यप्रणाली अब पूरी तरह निजी एजेंटों के हाथों में सिमट चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, जिन जिम्मेदार अधिकारियों के पास लाइसेंस को अप्रूव या रिजेक्ट करने की गोपनीय लॉग-इन आईडी और पासवर्ड होने चाहिए, वे खुलेआम एजेंटों के पास हैं। इन आईडी-पासवर्ड का दुरुपयोग करके दलाल खुद ही दफ्तरों में बैठकर फाइलों को पास कर रहे हैं। इस अव्यवस्था के कारण ‘जनता परेशान और अफसर मालामाल’ वाली स्थिति बनी हुई है।
रिश्वतखोरी का नया रेट: महज 800 रुपये में लाइसेंस पास!
सड़क पर गाड़ी चलाने की योग्यता जांचने के बजाय यहाँ केवल पैसों का लेन-देन देखा जा रहा है। लाइसेंस के नाम पर दफ्तरों के बाहर और भीतर सरेआम रिश्वतखोरी चल रही है। नियमों के अनुसार कठिन टेस्ट पास करने के बजाय, दलालों को 800 रुपये की एंट्री फीस (रिश्वत) देते ही बिना गाड़ी छुए भी ड्राइविंग लाइसेंस को ‘पास’ मार्क दे दिया जाता है।
सड़क सुरक्षा से सीधा खिलवाड़
बिना किसी टेस्ट या वैलिड ट्रेनिंग के चारपहिया (Four-Wheeler) और हैवी वाहनों के लाइसेंस बांटना सीधे तौर पर मासूम लोगों की जान जोखिम में डालना है। ऐसे अप्रशिक्षित चालक जब बिना ट्रैफिक नियमों की जानकारी के सड़कों पर गाड़ियां लेकर उतरेंगे, तो सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ना तय है। विभाग की इस लापरवाही पर अब सामाजिक संगठनों और सजग नागरिकों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग शुरू कर दी है।
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