Tripura High Court ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कोई भी बार एसोसिएशन या बार काउंसिल किसी वकील को कोर्ट में पेश होने पर दंडित नहीं कर सकती। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति T Amarnath Goud ने Sampad Choudhury v State Of Tripura & Ors. मामले में अंतरिम राहत देते हुए की।
मामला उस जूनियर अधिवक्ता से जुड़ा था, जिसे Tripura Bar Association ने कोर्ट बहिष्कार के बावजूद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, अगरतला में पेश होने पर निलंबित कर दिया था और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अधिवक्ताओं का मुख्य कर्तव्य अपने मुवक्किल का प्रतिनिधित्व करना और न्यायालय की सहायता करना है, जिसे किसी बार एसोसिएशन के नियम या प्रस्ताव से रोका नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों की कार्रवाई कानून के विपरीत है और इसे सुधारे जाने की आवश्यकता है।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि किसी भी बार काउंसिल या बार एसोसिएशन के नियमों में अदालतों के बहिष्कार की व्यवस्था नहीं है।
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