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पाकिस्तान की न्यायपालिका पर महरंग बलोच का गंभीर आरोप, बोलीं- सिद्धांतों को दरकिनार कर सुनाए जा रहे फैसले

क्वेटा। मानवाधिकार कार्यकर्ता और बलूच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) की मुख्य आयोजक महरंग बलोच ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की न्यायपालिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका राज्य संस्थानों की सहयोगी की भूमिका निभा रही है और न्याय के मूल सिद्धांतों को कमजोर किया जा रहा है।

क्वेटा की हुडा जेल से जारी बयान में, जिसे बीवाईसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, महरंग बलोच ने कहा कि न्यायपालिका ने अपना प्रभाव और जनता का भरोसा पूरी तरह खो दिया है। उनके मुताबिक न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्रता अब समाप्त हो चुकी है।

उन्होंने आरोप लगाया, ” बलूचिस्तान के मुख्य न्यायाधीश कामरान मुलाखाई व्यक्तिगत रूप से बीवाईसी से जुड़े सभी मामलों को देख रहे हैं। उनके नेतृत्व में न्यायमूर्ति मुहम्मद अली मुबीन, न्यायमूर्ति कादिर शाह बुखारी और बलूचिस्तान में बीवाईसी मामलों की सुनवाई कर रहे अन्य न्यायाधीशों को राज्य के निर्देशों के मुताबिक फैसले देने का काम सौंपा गया है।”

महरंग ने बीवाईसी नेता गुलजादी बलोच के मामले को कथित न्यायिक कदाचार का उदाहरण बताया। उन्होंने दावा किया कि संबंधित न्यायाधीश ने कई मौकों पर कहा कि वह दबाव में हैं और उन्हें मामले में सजा सुनाने के निर्देश दिए गए हैं। उनके मुताबिक इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने कहा कि 7 सितंबर को अदालत में हड़ताल होने और बचाव पक्ष के वकील के मौजूद नहीं रहने के बावजूद गुलजादी बलोच के मामले की कार्यवाही जारी रखी गई। इस दौरान एक गवाह से जिरह भी वकील की अनुपस्थिति में कराई गई। महरंग ने कहा कि यह बचाव के मौलिक अधिकार और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।

बलूच कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उनके मामलों में उनकी सहमति के बिना सरकारी वकील नियुक्त किए गए और उन्हें इस्लामाबाद पहुंचने के लिए विभिन्न सुविधाएं दी गईं, जबकि बीवाईसी कार्यकर्ताओं को अपने बचाव के मौलिक अधिकार से वंचित किया गया।

उन्होंने सवाल उठाया,”क्या यही पाकिस्तान के इस्लामिक गणराज्य में न्याय है, जहां अदालतें स्वतंत्र फैसला देने के बजाय राज्य संस्थानों द्वारा पहले से तय फैसलों को सुनाने की भूमिका निभा रही हैं।”

महरंग के अनुसार, बीवाईसी ने 13 जून से 10 सितंबर के बीच कथित “फेसलेस ट्रायल्स” के विरोध में 20 सुनवाइयों का बहिष्कार किया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में बलूचिस्तान हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी, लेकिन मुख्य न्यायाधीश कामरान मुलाखाई के नेतृत्व में अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई करने और बचाव के मौलिक अधिकार की रक्षा करने के बजाय मामले को लगातार टाल दिया।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पिछले छह महीनों से उनकी जमानत अर्जियों पर सुनवाई करने के बजाय मुख्य न्यायाधीश मुलाखाई बार-बार मामलों को सूची से हटा रहे हैं। महरंग ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही किसी व्यक्ति को सजा देना और जमानत से जुड़े मामलों में लगातार देरी करना न्याय के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है।

महरंग बलोच ने पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से बीवाईसी मामलों में कथित “न्यायिक पक्षपात,” बचाव के अधिकार से वंचित किए जाने और न्याय में देरी का तत्काल संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की भी मांग की।

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