बालोतरा/दिल्ली। राजस्थान में प्रदूषण, अवैध औद्योगिक इकाइयों, भूजल दोहन और अवैध खनन से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सख्त रुख देखने को मिला। करीब 32 मिनट चली सुनवाई में सांगानेर क्षेत्र में 800 से अधिक अवैध इकाइयों के संचालन, बालोतरा के डार्क जोन में बिना अनुमति बोरवेल चलाने और पानी को ट्रीट करके औद्योगिक इकाइयों को बेचने जैसे गंभीर मुद्दे उठे। इसके साथ ही अवैध खनन के मामले में भी अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। मामले में अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को होगी।
सुनवाई के दौरान सांगानेर में 800 से अधिक अवैध इकाइयों के संचालन का मुद्दा सामने आने पर न्यायाधीश ने गंभीर टिप्पणी करते हुए मामले की सीबीआई जांच कराने की बात कही। इस मुद्दे ने क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों की निगरानी और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, सीबीआई जांच के संबंध में अदालत के अंतिम लिखित आदेश की पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
100 और 500 मीटर के दायरे को लेकर सरकार पर नाराजगी
सुनवाई में 100 मीटर और 500 मीटर के दायरे का निर्धारण नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में अब तक स्पष्ट सीमा तय नहीं होने पर अदालत ने राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल के प्रति कड़ी नाराजगी जताई।
पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मामलों में निर्धारित दायरे का महत्व है, क्योंकि इसी आधार पर प्रतिबंधों, निगरानी और संबंधित गतिविधियों के नियमन की कार्रवाई की जाती है। ऐसे में सीमा का निर्धारण लंबित रहने से नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर असर पड़ सकता है। अदालत की नाराजगी के बाद इस विषय पर राज्य सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह महत्वपूर्ण रहेगा।
बालोतरा के डार्क जोन में बोरवेल संचालन का मामला
सुनवाई के दौरान बालोतरा जिले के डार्क जोन में भूजल दोहन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। आरोप है कि क्षेत्र में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) की आवश्यक अनुमति के बिना बोरवेल संचालित किए जा रहे हैं। डार्क जोन में भूजल का अत्यधिक दोहन जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा सकता है। इसी वजह से ऐसे क्षेत्रों में भूजल निकासी को लेकर अनुमति और नियामकीय शर्तों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।
मामले में पानी को ट्रीट करने के बाद औद्योगिक इकाइयों को बेचने का मुद्दा भी अदालत के सामने आया। इस संबंध में पानी के स्रोत, उसके उपचार, बिक्री और संबंधित अनुमतियों को लेकर उठे सवाल महत्वपूर्ण हैं। यह जांचना जरूरी होगा कि भूजल निकासी और पानी के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
अवैध खनन पर भी सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुनवाई में अवैध खनन का मुद्दा भी उठा, जिस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। अवैध खनन से पर्यावरण, भूजल स्तर और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसे मामलों में संबंधित विभागों की निगरानी और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की प्रभावशीलता अहम होती है।
राजस्थान में प्रदूषण और खनन से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान अदालत का जोर संबंधित नियमों के पालन और सरकारी विभागों की जवाबदेही पर रहा। सांगानेर की औद्योगिक इकाइयों से लेकर बालोतरा में भूजल दोहन और अवैध खनन तक, विभिन्न मुद्दों पर उठे सवाल पर्यावरणीय निगरानी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
27 नवंबर को फिर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई करीब 32 मिनट चली। अब मामले में अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को निर्धारित है। अगली सुनवाई में संबंधित मुद्दों पर राज्य सरकार और जिम्मेदार विभागों की ओर से रखे जाने वाले तथ्यों तथा अदालत के आगे के निर्देशों पर नजर रहेगी।
सांगानेर में अवैध इकाइयों की जांच, 100 और 500 मीटर के दायरे का निर्धारण, बालोतरा के डार्क जोन में बोरवेल संचालन और ट्रीटेड पानी की बिक्री तथा अवैध खनन जैसे विषय इस मामले को पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाते हैं। अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार इन मामलों में नियमों के अनुपालन और प्रभावी निगरानी के लिए क्या कदम उठाती है।
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