बालोतरा। शहर के वस्त्र उद्योग में प्रदूषण शुल्क (सेस) को लेकर एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिन औद्योगिक इकाइयों ने पर्यावरण सुरक्षा के लिए अपने खुद के ‘एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट’ (ETP) स्थापित कर रखे हैं और जो अपने रासायनिक अपशिष्ट जल का शोधन स्वयं कर रही हैं, उनसे भी हर महीने ‘कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट’ (CETP) का शुल्क वसूले जाने पर सवालिया निशान लग गए हैं।
हर महीने वसूले जा रहे 2 करोड़ से अधिक रुपए
उद्योगपतियों का दावा है कि बालोतरा में करीब 135 ऐसी इकाइयां हैं, जिनका खुद का ETP सुचारू रूप से संचालित हो रहा है। इन इकाइयों से हर महीने 2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि CETP शुल्क के रूप में वसूली जा रही है। उद्योग जगत का सबसे बड़ा तर्क यह है कि जब इन फैक्ट्रियों का अपशिष्ट जल CETP में ट्रीटमेंट के लिए जाता ही नहीं है, तो फिर उनसे यह भुगतान किस आधार पर लिया जा रहा है?
पारदर्शिता और नियमों पर खड़े हो रहे सवाल
इस दोहरी मार से स्थानीय उद्योगपतियों में रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि एक तरफ वे अपने स्तर पर महंगे ETP चलाकर प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनसे वह शुल्क भी वसूला जा रहा है जिसका उपयोग वे ले ही नहीं रहे हैं। इस मनमाने शुल्क निर्धारण को लेकर अब नियमों की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
उद्योग जगत में बढ़ता असंतोष
लगातार उठ रहे इन सवालों के बाद बालोतरा का वस्त्र उद्योग एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। उद्योगपतियों ने मांग की है कि इस पूरी व्यवस्था की उच्च स्तर पर समीक्षा की जाए और जिन यूनिट्स का कचरा CETP में नहीं जाता, उन्हें इस शुल्क से मुक्त किया जाए। यदि इस पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह मामला बड़ा रूप ले सकता है।
फिलहाल, इस खुलासे के बाद से प्रशासनिक और औद्योगिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
Corporate Post News