नई दिल्ली/जयपुर: सरकारी तंत्र में लापरवाही और ‘कागजी खानापूर्ति’ का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक को हिलाकर रख दिया है। सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के मुताबिक, पीएमओ की तरफ से एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए राजस्थान के राज्य वृक्ष ‘खेजड़ी’ (Khejri) का पौधा मंगवाया गया था, लेकिन संबंधित विभाग या अधिकारियों ने इतनी बड़ी लापरवाही दिखाई कि खेजड़ी की जगह ‘पीपल’ का पौधा थमा दिया।
यह मामला अब पूरी तरह तूल पकड़ चुका है और पीएमओ ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है।
पीएमओ क्यों है इस मामले में बेहद गंभीर?
सवाल सिर्फ एक पौधे का नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेशों की तामील और उसमें बरती गई घोर लापरवाही का है। जानकार मान रहे हैं कि पीएमओ इस बात को लेकर सबसे ज्यादा नाराज है कि इतनी बड़ी सुरक्षा और प्रशासनिक चूक आखिर हुई कैसे?
आमतौर पर पौधारोपण के कार्यक्रमों में कोई भी पौधा लगाया जा सकता है, लेकिन जब विशिष्ट रूप से ‘खेजड़ी’ के पौधे की मांग की गई थी, तो उसकी जगह पीपल का पौधा क्यों भेजा गया? और अगर खेजड़ी का पौधा उपलब्ध नहीं था, तो इसकी सही जानकारी उच्च अधिकारियों या पीएमओ को पहले क्यों नहीं दी गई? इस ‘चुपके से बदलाव’ करने की नीयत ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
उठे गंभीर सवाल: “यह तो सिर्फ एक मामला है, ऐसे कितने और…?”
इस खुलासे के बाद अब प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच कई तीखे सवाल तैरने लगे हैं:
- क्या यह सिर्फ एक मानवीय भूल है या इसके पीछे अधिकारियों का ‘चलता है’ वाला रवैया है?
- सबसे बड़ा सवाल: यह तो वो मामला है जो पीएमओ से जुड़े होने के कारण सामने आ गया, लेकिन ऐसे और कितने मामले होंगे जिन्हें फाइलों के नीचे दबाकर छुपा दिया गया?
रिफाइनरी घोटाले की यादें हुईं ताजा! इस मामले ने उस पुराने ढर्रे की याद दिला दी है, जहां कागजों में तो सब हरा-भरा दिखता है लेकिन जमीन बंजर होती है। ठीक वैसे ही, जैसे रिफाइनरी के आसपास हजारों पौधे लगाने की बात सरकारी दस्तावेजों और कागजों में तो पूरी तरह दर्ज है, लेकिन धरातल पर (जमीन पर) उनका कोई वजूद ही नहीं है।
अब किसकी तय होगी जिम्मेदारी?
यह मामला केवल एक पौधे के हेरफेर का नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवालिया निशान है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले की जांच के आदेश दिए जा सकते हैं।
अब देखना यह होगा कि इस बड़ी लापरवाही के पीछे किस बड़े अधिकारी या विभाग की गर्दन फंसती है और पीएमओ इस मामले में क्या कड़ा एक्शन लेता है?
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