मंगलवार, जून 23 2026 | 11:59:25 AM
Breaking News
Home / बाजार / वैश्विक अस्थिरता में कमी से वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में रुपए में आ सकती है रिकवरी: रिपोर्ट
Do this work before June 30, otherwise you will not get the benefit of this scheme of Modi government

वैश्विक अस्थिरता में कमी से वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में रुपए में आ सकती है रिकवरी: रिपोर्ट

नई दिल्ली. वैश्विक अस्थिरता में कमी और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा हाल में उठाए गए कदमों के कारण आने वाले समय में रुपए पर दबाव कम हो सकता है और इसमें रिकवरी देखने को मिल सकती है। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

एलारा सिक्योरिटीज की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में डॉलर के मुकाबले रुपए में मजबूती देखने को मिल सकती है। इसकी वजह चालू खाते घाटे पर दबाव कम होना और प्रवाह का बढ़ना है, जिससे रुपया 93-95 की रेंज में रह सकता है।

अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाता है, जैसा कि उम्मीद है कि वित्त 27 की दूसरी छमाही में 50 आधार अंक की बढ़ोतरी होगी, तो इससे रुपए समेत उभरते बाजारों की विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ सकता है और इससे करेंसी की मजबूती सीमित रह सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पॉलिसी में बदलाव से निकट अवधि में स्थिति को संभालने में मदद मिली। साथ ही, विदेशी मुद्रा बाजार को स्थिर करने के उपायों, सरकारी बॉन्ड पर टैक्स में छूट और डेट-आधारित विदेशी मुद्रा निवेश को आकर्षित करने के लिए दिए गए प्रोत्साहन का भी इसमें योगदान रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, 5 जून 2026 के ऐतिहासिक इनकम-टैक्स ऑर्डिनेंस – जिसने एफपीआई के लिए भारत की सरकारी प्रतिभूतियों निवेश को टैक्स-फ्री बना दिया – की वजह से भारतीय डेट मार्केट में निवेश का प्रवाह फिर से ठीक-ठाक स्तर पर आ गया है और यील्ड में भी कमी आई है।

आरबीआई की पॉलिसी के बाद से 10 ट्रेडिंग दिनों में एफएआर रूट से भारत के डेट मार्केट में एफपीआई का निवेश बढ़कर 1.7 बिलियन डॉलर हो गया है, जबकि पॉलिसी से पहले के 10 ट्रेडिंग दिनों में यह 229 मिलियन डॉलर था। ग्लोबल ब्लूमबर्ग बॉन्ड इंडेक्स में भारत के संभावित शामिल होने को मिलाकर, भारत में कुल निवेश 80-85 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

हालांकि, वित्त वर्ष 27 के लिए करंट अकाउंट फंडिंग से जुड़े जोखिम कम हो रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट में वित्त वर्ष 28 में लंबे समय तक विदेशी पूंजी के प्रवाह को लेकर चिंता जताई गई है। इसकी वजह ग्लोबल स्तर पर एफडीआई का कम होना, अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी का सख्त होना और टेक सेक्टर में निवेश के यूएस पर केंद्रित होने के कारण भारत में एफपीआई इक्विटी निवेश का कम रहने की संभावना है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के एआई निवेश का केंद्र बने रहने के बीच वहां ब्याज दरें बढ़ने का दौर शुरू होने वाला है, इसलिए भारतीय इक्विटी में एफपीआई निवेश का आउटलुक निराशाजनक बना हुआ है।

फर्म ने अनुमान लगाया है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर 2026, दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 में 25-25 आधार अंक की तीन बार ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

 

Check Also

सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने पर सौगत रॉय का विरोध, बोले-इससे विभाजन को मिलेगा बल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू रोड का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *