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हिंद महासागर में सेशेल्स भारत के लिए विशेष साझेदार, ये दोनों देशों को जोड़ता है: पीएम मोदी

विक्टोरिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए कहा कि हिंद महासागर भारत और सेशेल्स को अलग नहीं करता, बल्कि दोनों देशों को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत की हिंद महासागर संबंधी दृष्टि में सेशेल्स का विशेष स्थान है और दोनों देशों के रिश्ते सरकारों से पहले लोगों के बीच बने थे।

नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने मोदी ने कहा, “स्पीकर सिल्वेन लिबियन, सरकार के नेता बर्नार्ड जॉर्ज, विपक्ष के नेता, नेशनल असेंबली के सम्मानित सदस्य और मेरे प्रिय भाइयों-बहनों, नमस्कार। इस प्रतिष्ठित सदन को संबोधित करना मेरे लिए विशेष सम्मान की बात है।”

प्रधानमंत्री ने अपने स्वागत के लिए स्पीकर का आभार जताते हुए कहा कि वह राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी और सेशेल्स की जनता के भी आभारी हैं, जिन्होंने उन्हें रविवार को ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ सम्मान से सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करने वाले सभी लोगों को प्रेरित करेगा।

उन्होंने कहा, “मैं अपने साथ भारत के 1.4 अरब लोगों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं लेकर आया हूं।”

पीएम मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद वर्ष 2015 में हिंद महासागर क्षेत्र में उनकी पहली यात्रा सेशेल्स की थी और यह अफ्रीका का भी उनका पहला दौरा था। उन्होंने कहा कि उन्होंने सबसे पहले सेशेल्स इसलिए चुना, क्योंकि भारत की हिंद महासागर संबंधी सोच में इस देश का विशेष महत्व है।

सेशेल्स की स्वतंत्रता के 50 वर्ष पूरे होने पर वहां की जनता को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और सेशेल्स की मित्रता केवल राजनयिक संबंधों की 50 वर्ष पुरानी नहीं है, बल्कि इसका इतिहास इससे कहीं अधिक पुराना है।

उन्होंने कहा कि अगस्त 1770 में जहाज ‘टेलीमाक’ से सेंट ऐनी द्वीप पहुंचे लोगों में पांच भारतीय भी शामिल थे। यही यात्रा दोनों देशों के बीच मानवीय रिश्तों की शुरुआत बनी और समय के साथ भारतीय समुदाय आधुनिक सेशेल्स की कहानी का अभिन्न हिस्सा बन गया।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे संबंध सरकारों ने नहीं बनाए। इन्हें लोगों ने बनाया, परिवारों ने आगे बढ़ाया और पीढ़ियों ने संजोकर रखा। हिंद महासागर ने इस रिश्ते को मजबूत किया है। यही कारण है कि हम अजनबियों की तरह नहीं, बल्कि पुराने मित्रों की तरह मिलते हैं।”

सेशेल्स की विविधतापूर्ण संस्कृति की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि इस देश की सबसे बड़ी ताकत उसके लोग हैं। दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों ने अपनी भाषाएं, परंपराएं और संस्कृतियां साथ लाकर एक साझा ‘सेशेल्वा’ पहचान का निर्माण किया है।

उन्होंने कहा कि नेशनल असेंबली का आदर्श वाक्य ‘यूनिटी इन डायवर्सिटी’ (विविधता में एकता) इस भावना को दर्शाता है। यह क्रियोल संगीत, माउत्या नृत्य और फेस्टिवल क्रियोल जैसे आयोजनों में दिखाई देता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और सेशेल्स के सांस्कृतिक संबंध रोजमर्रा के जीवन में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि ‘कारी कोको’, समोसे और चटनी के स्वाद से लेकर दीपावली, थाई पोंगल और नवरात्रि के दौरान गरबा जैसे उत्सव दोनों देशों के सांस्कृतिक जुड़ाव को और मजबूत करते हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि यही साझा सांस्कृतिक विरासत और क्रियोल भावना भविष्य में भारत-सेशेल्स मित्रता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

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