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A government software update or a public bluff? The removal of the most significant transparency feature raises serious questions.

राजकाज सॉफ्टवेयर का ‘अपडेट’ या जनता की आँखों में धूल? पारदर्शिता का सबसे बड़ा फीचर हटा, उठ रहे बड़े सवाल

जयपुर। राजस्थान के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता लाने और ‘ई-गवर्नेंस’ को मजबूती देने के दावे के साथ करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया ‘राजकाज’ (RajKaj) सॉफ्टवेयर अब खुद सवालों के घेरे में है। जिस सॉफ्टवेयर को फाइलों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए विकसित किया गया था, उसके ताजा अपडेट ने न केवल सरकारी कार्यप्रणाली को जटिल बना दिया है, बल्कि पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

क्या था राजकाज का मूल उद्देश्य?

राजकाज को इसलिए लाया गया था ताकि आम नागरिक और सरकारी कर्मी आसानी से फाइल का स्टेटस ट्रैक कर सकें। सिस्टम में यह पारदर्शिता थी कि:

  • फाइल किस अधिकारी या कर्मचारी के पास पेंडिंग है।
  • फाइल कितने दिनों से एक ही टेबल पर अटकी हुई है।
  • फाइल की मूवमेंट हिस्ट्री क्या है।

इस सुविधा के कारण आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर नहीं काटने पड़ते थे और उन्हें गुमराह करना आसान नहीं था।

अपडेट के नाम पर फीचर गायब, ‘मंशा’ पर उठे सवाल

हालिया अपडेट के बाद, राजकाज सॉफ्टवेयर से फाइल स्टेटस चेक करने का मुख्य ऑप्शन ही हटा दिया गया है। सरकारी सिस्टम में इस बदलाव ने हड़कंप मचा दिया है। विशेषज्ञों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि सॉफ्टवेयर के अपडेट्स के नाम पर पहले ही लाखों-करोड़ों रुपये का बजट खर्च किया जा चुका है। ऐसे में, सॉफ्टवेयर के सबसे ‘आधारभूत फीचर’ (Core Feature) को ही हटा देना एक सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है।

क्या ‘पब्लिक मनी’ का हुआ है दुरुपयोग?

आम जनता और प्रशासनिक गलियारों में अब यह चर्चा आम हो गई है कि क्या राजकाज सॉफ्टवेयर ‘पब्लिक मनी वेस्टेज’ (Public Money Wastage) का एक नया उदाहरण बन चुका है? करोड़ों खर्च करने के बाद यदि सिस्टम पहले से ज्यादा ‘अस्पष्ट’ हो रहा है, तो इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?

  • पारदर्शिता पर प्रहार: फाइल स्टेटस छिपने से भ्रष्टाचार और फाइलों को दबाने की गुंजाइश बढ़ गई है।
  • जवाबदेही का अभाव: जब फाइल की स्थिति पता ही नहीं चलेगी, तो अधिकारी या कर्मचारी पर कोई नैतिक दबाव नहीं रहेगा।

प्रशासनिक चुप्पी पर भारी दबाव

सवाल यह है कि आखिर किस अधिकारी या एजेंसी ने इस फीचर को हटाने का निर्णय लिया? क्या इसके पीछे किसी भ्रष्ट लॉबी का दबाव है जो नहीं चाहती कि फाइलों की मूवमेंट आम जनता को पता चले? सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि किसी भी सॉफ्टवेयर को ‘अपग्रेड’ करने का उद्देश्य उसकी दक्षता बढ़ाना होता है, उसे ‘विकलांग’ करना नहीं।

राजकाज पर हुई इस कार्रवाई ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। अब देखना यह है कि क्या शासन सचिवालय इस मामले में स्पष्टीकरण जारी कर यह फीचर वापस बहाल करता है या फिर प्रशासनिक फाइलों की यह ‘अंधेरी कोठरी’ जारी रहेगी?

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