लाखों निवेशकों के पैसे की वापसी के बीच राजस्थान की PACL संपत्तियों पर उठे बड़े सवाल; सुप्रीम कोर्ट में कई जमीनों के मालिकाना हक को लेकर विवाद
जयपुर। देश के बड़े निवेश विवादों में शामिल PACL Limited का मामला एक बार फिर राजस्थान की जमीनों को लेकर सवालों के घेरे में है। लाखों निवेशकों से जुटाए गए पैसे की वापसी के लिए PACL की संपत्तियों के निपटान और बिक्री की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ रही है। Justice (Retd.) R.M. Lodha Committee और SEBI की प्रक्रिया के बीच राजस्थान की कई जमीनों के स्वामित्व को लेकर आपत्तियां सामने आ चुकी हैं।
सबसे बड़ा सवाल है—जिन जमीनों को PACL की संपत्ति बताकर नीलामी की सूची में शामिल किया गया, उनका वास्तविक मालिक कौन है?
राजस्थान बना PACL की जमीनों का बड़ा केंद्र
जैसलमेर, पोखरण, बीकानेर, जोधपुर, ओसियां और बाड़मेर सहित पश्चिमी राजस्थान के कई क्षेत्रों की जमीनें PACL से जुड़ी संपत्तियों के रूप में सामने आई हैं। इनमें से कुछ संपत्तियों पर निजी व्यक्तियों ने दावा किया कि जमीन PACL की नहीं, बल्कि उनकी है।
यहीं से मामला और गंभीर हो जाता है। यदि जमीन PACL की थी तो राजस्व रिकॉर्ड में PACL का नाम क्यों नहीं दिखाई देता? और यदि जमीन किसी निजी व्यक्ति की थी तो वह PACL की संपत्ति की सूची में कैसे शामिल हुई?
‘अपना खाता’ और जमाबंदी से जुड़े सवाल
Corporate Post की पड़ताल में सामने आए रिकॉर्ड के आधार पर कुछ मामलों में ‘अपना खाता’ और जमाबंदी में दर्ज नाम तथा PACL से संबंधित संपत्ति रिकॉर्ड के बीच अंतर की जांच की जरूरत दिखाई देती है।
किसी भी विवादित जमीन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उसकी पूरी Title Chain यानी मूल मालिक से वर्तमान मालिक तक की स्वामित्व श्रृंखला, रजिस्ट्री, भुगतान रिकॉर्ड, नामांतरण और वर्तमान जमाबंदी का मिलान जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे विवाद
PACL संपत्तियों पर आपत्तियों की जांच के लिए Retired District Judge R.S. Virk की भूमिका रही। बाद में कई विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे। 19 फरवरी 2026 से संबंधित कार्यवाही में 106 मामलों को Category-B के तहत दस्तावेजी जांच के लिए Recovery Officers के समक्ष भेजे जाने की प्रक्रिया सामने आई है।
इसका अर्थ है कि संबंधित मामलों में दस्तावेजों के आधार पह जांच महत्वपूर्ण है कि विवादित जमीन वास्तव में PACL की संपत्ति थी या किसी स्वतंत्र खरीदार की।
पूर्व मंत्री के परिवार से जुड़े नाम भी सवालों में
राजस्थान के कुछ भूमि लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों में एक पूर्व कैबिनेट मंत्री के परिवार से जुड़े व्यक्तियों के नाम होने का दावा भी सामने आया है। हालांकि किसी व्यक्ति का नाम किसी भूमि दस्तावेज में होना अपने आप में अपराध या अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इन मामलों में वास्तविक भूमिका और लेन-देन की स्थिति दस्तावेजी एवं कानूनी जांच से ही स्पष्ट हो सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल
अगर PACL की जमीनें बेचकर निवेशकों का पैसा लौटाया जाना है, तो प्रत्येक संपत्ति का स्वामित्व स्पष्ट होना जरूरी है।
जमीन किसकी थी? भुगतान किसने किया? नामांतरण किसके नाम हुआ? और PACL की नीलामी सूची में संपत्ति कैसे पहुंची?
इन सवालों के जवाब न केवल राजस्थान की जमीनों का सच सामने ला सकते हैं, बल्कि लाखों निवेशकों के वर्षों पुराने इंतजार के समाधान में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
PACL Files – Part 2 में: राजस्थान में PACL से जुड़ी जमीनों का जिला-वार विवरण, ‘अपना खाता’ और रजिस्ट्री रिकॉर्ड में सामने आए सवाल तथा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे प्रमुख भूमि विवाद।
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