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Center and states start joint investigation of drug factories

भारत को जेनेरिक दवाओं से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू फार्मा उत्पादों और एपीआई निर्माण में बड़ी छलांग लगाने की जरूरत: अर्थशास्त्री

नई दिल्ली। भारत दुनिया में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता और वैक्सीन तथा आवश्यक दवाओं का प्रमुख उत्पादक है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अब भारत को उच्च मूल्य वाली फार्मास्युटिकल दवाओं और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) के निर्माण में बड़ी छलांग लगाने की जरूरत है। इसके लिए मजबूत प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाओं की आवश्यकता होगी।

मंगलवार को जारी नीति आयोग की फार्मास्युटिकल व्यापार रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अर्थशास्त्री वेद जैन ने कहा कि अब भारत के लिए उच्च मूल्य वाली दवाओं के निर्यात में आगे बढ़ने का सही समय है।

उन्होंने कहा, “हमें मूल दवाओं और उनसे जुड़ी सुविधाओं के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार पर निवेश करना चाहिए। मेरा मानना है कि उच्च मूल्य वाली दवाओं और एपीआई उत्पादों के लिए एक मजबूत पीएलआई योजना होनी चाहिए।”

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त अभी मुख्य रूप से फार्मूलेशन, रिटेल दवाओं और जेनेरिक मेडिसिन के क्षेत्र में केंद्रित है।

भारत अमेरिका और यूरोप जैसे सख्त नियामकीय मानकों वाले बाजारों में भी जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में मजबूत प्रतिस्पर्धा बनाए हुए है।

वेद जैन ने कहा कि भारत को नियामकीय बाधाओं को और कम करना होगा, उत्पादन क्षमता बढ़ानी होगी और साथ ही उच्च मूल्य वाली फार्मास्युटिकल दवाओं का उत्पादन बढ़ाना होगा ताकि उनका निर्यात किया जा सके।

उन्होंने कहा कि भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) इस दिशा में मददगार साबित होंगे, बशर्ते कुछ नियामकीय प्रतिबंधों को दूर किया जाए।

फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना बायोफार्मास्युटिकल्स, जटिल जेनेरिक दवाओं, पेटेंट और ऑफ-पेटेंट दवाओं, दुर्लभ बीमारियों की दवाओं तथा ऑटोइम्यून रोगों की दवाओं जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देती है।

सितंबर 2025 तक इस योजना के तहत कुल 3,08,408.60 करोड़ रुपए की बिक्री दर्ज की गई, जिसमें 1,98,509.49 करोड़ रुपए का निर्यात शामिल है।

योजना के तहत सितंबर 2025 तक कुल 40,294 करोड़ रुपए का निवेश किया गया, जो निर्धारित लक्ष्य 17,275 करोड़ रुपए से काफी अधिक है।

घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली पीएलआई योजना ने बल्क ड्रग्स के आयात पर भारत की निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक फार्मास्युटिकल उद्योग अब तेजी से उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों जैसे बायोलॉजिक्स, वैक्सीन, इम्यूनोलॉजिकल्स और एडवांस्ड थेरेप्यूटिक्स की ओर बढ़ रहा है।

हालांकि, इन क्षेत्रों में भारत की निर्यात उपस्थिति अभी सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इन क्षेत्रों में निवेश और उत्पादन बढ़ाता है, तो वह वैश्विक फार्मा उद्योग में अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकता है।

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