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एयर इंडिया के कॉकपिट में फिर सवार टाटा

नई दिल्ली. टाटा संस सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया और उसकी सहायक इकाई एयर इंडिया एक्सप्रेस तथा ग्राउंड हैंडलिंग इकाई एआईएसएटीएस में 50 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए सफल बोलीदाता के रूप में सामने आई है। एयर इंडिया करीब 60,000 करोड़ रुपये सेे ज्यादा के घाटे  में है। टाटा ने एयर इंडिया के लिए 18,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई है, जिनमें से 15,300 करोड़ रुपये कर्ज है और 2,700 करोड़ रुपये नकद भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा टाटा 42 बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमानों के पट्टे के लिए भी 9,185 करोड़ रुपये की देनदारी चुकाएगी। दूसरे बोलीदाता स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह की अगुआई वाले कंसोर्टियम ने 15,100 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। इनमें से 12,835 करोड़ रुपये कर्ज लेने का प्रस्ताव था और 2,265 करोड़ रुपये नकद भुगतान करने की पेशकश की गई थी। सरकार ने एयर इंडिया की आरक्षित कीमत 12,906 करोड़ रुपये तय की थी।

विशेषज्ञों ने इसे दोनों पक्षों के लिए मुनाफे का सौदा करार दिया है। टाटा संस पहले से ही दो विमानन कंपनियों- विस्तारा और एयर एशिया इंडिया का परिचालन कर रही है और इस सौदे से वह करीब 27 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ घरेलू बाजार में दूसरी सबसे बड़ी विमानन कंपनी हो जाएगी जबकि अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर यह देश की सबसे बड़ी कंपनी होगी। सूत्रों ने कहा कि टाटा की योजना एयर इंडिया के परिचालन को विस्तारा के साथ एकीकृत कर अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम विमानन कंपनी बनाने की है और एयर इंडिया एक्सप्रेस का एयर एशिया इंडिया के साथ विलय किया जाएगा। एयर इंडिया के पास प्रमुख हवाईअड्डों पर 2,486 घरेलू एवं 2,738 अंतरराष्ट्रीय स्लॉट हैं। मामले के जानकार एक शख्स ने कहा, ‘शुरुआती चरण में नेटवर्क का पुनर्गठन किया जाएगा, ताकि विस्तारा, एयर एशिया इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और एयर इंडिया एक-दूसरे से प्रतिस्पद्र्घा न करे बल्कि एक-दूसरे के प्लेटफॉर्म पर उसकी टिकटों की बिक्री हो सके। टाटा समूह की विमानन कंपनी के लिए एक सुपर ऐप बनाने की भी योजना है।’

सरकार ने एयर इंडिया का परिचालन जारी रखने के लिए 2009-10 से 54,584 करोड़ रुपये नकद लगा चुकी है और 55,692 करोड़ रुपये की गारंटी मदद दी है, जो कुल मिलाकर 1,10,276 करोड़ रुपये है। इसके बावजूद एयर इंडिया मुनाफे में नहीं आ सकी। दीपम के सचिव तुहिन कांत पांडे ने कहा कि अनुमान के मुताबिक एयर इंडिया पर सरकार का हर महीने 620 करोड़ रुपये खर्च होता है और उसका रोजाना घाटा करीब 20 करोड़ रुपये का है।

टाटा संस के सेवानिवृत्त चेयरमैन रतन टाटा ने कहा, ‘एयर इंडिया के लिए बोली जीतना टाटा समूह के लिए अच्छी खबर है।’ उन्होंने कहा कि एयर इंडिया को पटरी पर लाने के लिए काफी प्रयास करने होंगे और यह निश्चित तौर पर टाटा समूह को विमानन उद्योग में मजबूत बाजार का अवसर उपलब्ध कराएगी।

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