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बालोतरा: लाखों की लागत से बना पटवार भवन बना सफेद हाथी, ग्रामीण सरकारी सेवा के लिए भटकने को मजबूर

बालोतरा। जिले के कीटनोद गांव में सरकारी सुविधाओं को आमजन तक पहुँचाने के उद्देश्य से बनाया गया पटवार भवन वर्तमान में उपेक्षा का शिकार है। लाखों रुपए की लागत से तैयार यह भवन लंबे समय से बंद पड़ा है, जिसके चलते ग्रामीणों को अपने राजस्व कार्यों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

निजी दुकानों पर निर्भर ग्रामीण

भवन के बंद रहने के कारण ग्रामीणों की परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें जाति प्रमाण-पत्र, मूल निवास, जमाबंदी और अन्य आवश्यक राजस्व कार्यों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। मजबूरी में पटवारी को गांव में लोगों के दस्तावेज बनाने का काम निजी दुकानों से चलाना पड़ रहा है, जिससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आर्थिक भार और मानसिक असुविधा का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों की बार-बार मांग, प्रशासन का मौन

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में प्रशासन से कई बार गुहार लगाई है, बावजूद इसके पटवार भवन को आमजन की सुविधा के लिए नहीं खोला गया है। सरकारी भवन के ताले बंद होने से स्थानीय निवासियों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का तर्क है कि जब भवन बनकर तैयार है, तो उसे बंद रखने का क्या औचित्य है?

प्रशासन से तत्काल कार्यवाही की गुहार

कीटनोद गांव के निवासियों और जन प्रतिनिधियों ने अब जिला प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि:

  • पटवार भवन को अविलंब आमजन के लिए चालू किया जाए।

  • भवन में नियमित रूप से पटवारी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को निजी दुकानों के चक्कर न काटने पड़ें।

यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी है।

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