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बाड़मेर स्टेशन पर उत्तर पश्चिम रेलवे के पहले वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट का शुभारंभ, महाप्रबंधक बोले- जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी

बाड़मेर. बाड़मेर रेलवे स्टेशन पहुंचे उत्तर-पश्चिम रेलवे के डीआरएम अमिताभ त्रिपाठी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाड़मेर से करीब 25 किलोमीटर दूर चावा गांव में उत्तर-पश्चिम रेलवे महिला कल्याण संगठन द्वारा लगभग 4 से 4.5 लाख रुपये की लागत से एक सुलभ कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया गया है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से बालिकाओं के लिए बेहतर स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

डीआरएम ने बताया कि उत्तर-पश्चिम रेलवे का पहला आधुनिक वाटर रिसाइकिलिंग प्लांट लॉन्ड्री के साथ स्थापित किया गया है। यह प्लांट लॉन्ड्री से निकलने वाले पानी को रिसाइकिल कर दोबारा उपयोग के योग्य बनाएगा। इससे लाखों लीटर पानी की बचत होगी। लगभग 100 प्रतिशत रिसाइकिलिंग प्रक्रिया के बाद 80 प्रतिशत पानी पुनः उपयोग के लिए उपलब्ध हो जाएगा और केवल 20 प्रतिशत ताजा पानी की आवश्यकता पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि भविष्य में उत्तर-पश्चिम रेलवे की सभी लॉन्ड्री में ऐसे वाटर रिसाइकिलिंग प्लांट स्थापित करने की योजना है। इसके अलावा रेलवे अधिकारियों का दल रिफाइनरी क्षेत्र की कनेक्टिविटी और अन्य विकास कार्यों को लेकर बालोतरा का भी दौरा करेगा।

वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट की शुरुआत

उत्तर पश्चिम रेलवे ने जल संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर जोन के पहले वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट की शुरुआत की है. गुरुवार को उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक अमिताभ ने प्लांट का उद्घाटन किया और रेलवे स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं और प्रगति का जायजा लिया.

उदघाटन के बाद उन्होंने बताया कि लगभग 2.57 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित इस प्लांट के माध्यम से रेलवे लिनन की धुलाई में उपयोग किए गए पानी को शुद्ध कर पुनः धुलाई कार्य में इस्तेमाल किया जाएगा. इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा. यह परियोजना विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी साबित होगी. जल संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास की दिशा में यह पहल रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे बड़ी मात्रा में पानी की बचत संभव हो सकेगी.

क्या होता है वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट : वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट एक ऐसी प्रणाली है, जो उपयोग किए जा चुके पानी को साफ और उपचारित करके दोबारा उपयोग के योग्य बनाती है. बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर स्थापित प्लांट में रेलवे के लिनन (चादर, तकिया कवर, तौलिया आदि) की धुलाई में इस्तेमाल होने वाले पानी को सीधे फेंकने के बजाय एकत्र किया जाता है. इसके बाद विभिन्न चरणों में उसका उपचार किया जाता है.

रेलवे स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण करते महाप्रबंधक

इसके प्रमुख लाभ

  1. पानी की बचत होती है.
  2. भूजल और अन्य जल स्रोतों पर दबाव कम होता है.
  3. अपशिष्ट जल का प्रदूषण घटता है.
  4. पानी की कमी वाले क्षेत्रों, जैसे पश्चिमी राजस्थान में विशेष रूप से उपयोगी है.
  5. रेलवे के पानी के खर्च में कमी आती है.
एक दिवसीय बाड़मेर दौरे पर पहुंचे महाप्रबंधक ने वॉशिंग लाइन क्षेत्र में स्थापित वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट का बटन दबाकर शुभारंभ किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि परियोजना की उपयोगिता को देखते हुए उत्तर पश्चिम रेलवे के अन्य मंडलों में भी ऐसे संयंत्र स्थापित करने की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा. इससे पहले महाप्रबंधक अमिताभ ने बाड़मेर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकसित रेलवे स्टेशन का बारीकी से मुआयना किया और स्वच्छता और यात्री सुविधाओं के उन्नयन व संरक्षण पर बल दिया. इस अवसर पर जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी, मुख्य यांत्रिक इंजीनियर (योजना) मनीष राजवंशी, मुख्य परियोजना प्रबंधक (गति शक्ति) सुनील कुमार आदि मौजूद रहे.

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