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Anti-dumping duty may save ₹28,540 crore in foreign exchange, C-DEP expresses concern over rising imports

एंटी-डंपिंग ड्यूटी से ₹28,540 करोड़ विदेशी मुद्रा बचत संभव, बढ़ते आयात पर C-DEP ने जताई चिंता

70,000 करोड़ रुपये तक नए निवेश को मिल सकता है बढ़ावा, घरेलू उद्योग और MSME पर सस्ते आयात का बढ़ रहा दबाव, वाणिज्य मंत्रालय के सेंटर फॉर WTO स्टडीज के साथ जारी हुई रिपोर्ट

 

नई दिल्ली.  एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू होने से भारत हर साल करीब ₹28,540 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचा सकता है, जबकि घरेलू उद्योगों में ₹70,000 करोड़ तक अतिरिक्त निवेश का रास्ता खुल सकता है। सेंटर फॉर डोमेस्टिक इकॉनमी पॉलिसी रिसर्च (C-DEP) और केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के सेंटर फॉर WTO स्टडीज के साथ जारी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय तक सस्ते आयात से घरेलू उद्योगों और छोटे एवं मध्यम उद्योगों यानी एम एस एम ई पर दबाव बढ़ा है। अध्ययन में कहा गया है कि समय पर एंटी-डंपिंग उपाय लागू करने से घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत हो सकती है और उद्योगों को सहारा मिल सकता है। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब स्वंय प्रधानमंत्री लोगों से विदेश मुद्रा बचाने की अपील कर रहे हैं।

एंटी-डंपिंग ड्यूटी ऐसे मामलों में लगाई जाती है, जब विदेशी कंपनियां किसी उत्पाद को अपने घरेलू बाजार की तुलना में कम कीमत पर दूसरे देशों में बेचती हैं। सरकार इसका इस्तेमाल घरेलू उद्योगों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए करती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के वर्षों में कुछ खास अवधियों के दौरान एंटी-डंपिंग सिफारिशों के लागू नहीं होने के साथ चीन से आयात में वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू उत्पादन क्षमता मौजूद होने के बावजूद बढ़ते आयात से विदेशी मुद्रा और उद्योगों की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा पर दबाव पड़ सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत एंटी-डंपिंग ड्यूटी के इस्तेमाल में कई बड़े देशों की तुलना में अपेक्षाकृत संतुलित रुख अपनाता रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ऐसी ड्यूटी की औसत अवधि 6.97 वर्ष है, जबकि वैश्विक औसत 11.19 वर्ष है।

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