Balotra. यह तस्वीर पद्मश्री सम्मान प्राप्त कर अपने घर लौटे थार के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार तगाराम भील और उनकी मां की है।
थार के धोरों में उम्रभर अलगोजे की मीठी धुन बिखेरने वाले इस कलाकार को जब दिल्ली ने अपने सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक पद्मश्री से नवाज़ा, तो एक मां की आंखों में बरसों का संघर्ष, गर्व और ममता एक साथ छलक उठी।
यह सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि रेगिस्तान की मिट्टी से उठी उस साधना की पहचान है, जिसने लोक संगीत की मिठास को देशभर तक पहुंचाया। मां के चेहरे पर झलकती यह खुशी बताती है कि बेटे की सफलता में सबसे बड़ा हिस्सा अक्सर उसकी मां की दुआओं और त्याग का होता है।
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