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Major action against illegal mining of gypsum in Balotra

बालोतरा: प्रदूषण जांच पर उठे गंभीर सवाल, 30 घंटे की खुदाई के बाद भी ‘बेअसर’ रही कार्रवाई; मिलीभगत के आरोप

बालोतरा। शहर के रिको औद्योगिक क्षेत्र में रासायनिक प्रदूषण के खिलाफ चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन और खुदाई की कार्रवाई पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पिछले 30 घंटों से अधिक समय से जारी खुदाई के बावजूद, प्रशासन को उस संदिग्ध पाइपलाइन का दूसरा सिरा नहीं मिल पाया है, जिसके जरिए कथित तौर पर रासायनिक कचरा छोड़ा जा रहा था। इस धीमी और संदिग्ध कार्रवाई ने स्थानीय लोगों के बीच रोष बढ़ा दिया है।

‘बड़ी फर्म’ का नाम आने पर मामला दबाने का अंदेशा

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब कल जांच के दौरान संदिग्ध पाइपलाइन मिली थी, तो माना जा रहा था कि जल्द ही कोई बड़ा खुलासा होगा और प्रदूषण फैलाने वाले असली दोषियों के नाम सामने आएंगे। लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि जैसे ही इस पाइपलाइन के तार किसी ‘बड़ी औद्योगिक फर्म’ से जुड़ने की बात सामने आई, वैसे ही मामले को कथित तौर पर दबाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। जांच की दिशा बदलने से अब पूरी कार्रवाई पर ही सवालिया निशान लग गए हैं।

सीईटीपी ट्रस्टियों की भूमिका संदिग्ध?

इस पूरे घटनाक्रम में न केवल औद्योगिक इकाइयों, बल्कि ‘कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट’ (CETP) प्रबंधन पर भी आंच आ गई है। चर्चा है कि इस अवैध पाइपलाइन बिछाने के खेल में सीईटीपी के कुछ ट्रस्टियों की भी मिलीभगत हो सकती है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि सीईटीपी की जवाबदेही होने के बावजूद, ट्रस्टियों द्वारा की जा रही संदिग्ध चुप्पी इस पूरे मामले में उनकी संलिप्तता की ओर इशारा करती है।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

30 घंटे की लंबी खुदाई के बाद भी नतीजा शून्य रहने से प्रशासनिक उदासीनता भी उजागर हुई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में प्रदूषण मुक्त बालोतरा चाहता है, तो उसे बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने शहर में एक बार फिर प्रदूषण माफिया और अधिकारियों की सांठगांठ की चर्चाओं को हवा दे दी है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस दबाव से निकलकर किसी बड़ी कार्रवाई को अंजाम देगा या यह मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

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