जयपुर. भारत सरकार ने गुजरात के प्रतिष्ठित ‘मंगल परिवार’ की व्यावसायिक विरासत को सम्मानित करते हुए, समूह के संस्थापक स्वर्गीय तेजमल मंगल की स्मृति में 5 रुपये का स्मारक कॉर्पोरेट डाक टिकट जारी किया है।
84 वर्षों की गौरवशाली यात्रा स्वर्गीय तेजमल जी मंगल ने 1 जून, 1942 को एक दूरदर्शी उद्यमी के रूप में मंगल परिवार के व्यवसाय की नींव रखी थी। पिछले 84 वर्षों में, एक छोटे से व्यापारिक उपक्रम के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज एक विशाल और विविधीकृत औद्योगिक समूह में परिवर्तित हो चुकी है। इस औद्योगिक विरासत में ‘मंगलम ग्लोबल एंटरप्राइज लिमिटेड’ (MGEL) जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं, जो आज कृषि और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
अहमदाबाद में भव्य अनावरण समारोह इस विशेष स्मारक डाक टिकट का अनावरण अहमदाबाद स्थित मंगलम ग्लोबल एंटरप्राइज लिमिटेड के मुख्यालय में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में किया गया। इस अवसर पर मंगलम ग्लोबल एंटरप्राइज लिमिटेड के चेयरमैन विपिन प्रकाश मंगल के साथ परिवार की चौथी पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में चाणक्य प्रकाश मंगल और चंद्रगुप्त प्रकाश मंगल उपस्थित रहे। डाक विभाग की ओर से गुजरात सर्किल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल गणेश वी. सावलेश्वरकर और अहमदाबाद मुख्यालय क्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
संस्थापक के मूल्यों को नमन यह डाक टिकट स्वर्गीय तेजमल जी मंगल की उद्यमशीलता, अटूट दृढ़ संकल्प और उच्च नैतिक मूल्यों को एक विनम्र श्रद्धांजलि है। चार पीढ़ियों तक विस्तृत यह व्यावसायिक यात्रा भारत के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास में निरंतर अपना योगदान दे रही है।
इस अवसर पर चेयरमैन विपिन प्रकाश मंगल ने भावुक होते हुए कहा, “आज का दिन हमारे परिवार के लिए अत्यंत गर्व और गौरव का क्षण है। 1 जून, 1942 को मेरे दादाजी स्वर्गीय तेजमल जी मंगल ने जिस ईमानदारी और प्रतिबद्धता की नींव रखी थी, आज 84 वर्षों बाद उसे भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया जाना उस संपूर्ण यात्रा का सम्मान है। यह गौरव केवल मेरे दादाजी का नहीं, बल्कि हमारे उन सभी कर्मचारियों, साझेदारों और हितधारकों का है, जिन्होंने इस दृष्टि को साकार करने में योगदान दिया है।”
पीढ़ियों का सामंजस्य समारोह में चौथी पीढ़ी की सक्रिय उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि मंगल परिवार अपने संस्थापक द्वारा स्थापित सिद्धांतों और मूल्यों के प्रति आज भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। रू. 5 का यह स्मारक डाक टिकट न केवल एक स्वर्णिम इतिहास का प्रतीक है, बल्कि यह उस व्यावसायिक संस्कृति को भी रेखांकित करता है, जो पिछले आठ दशकों से निरंतर विकासोन्मुख और सशक्त बनी हुई है।
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