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Minister of State for Petroleum and Natural Gas Suresh Gopi

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने एलएनजी स्रोतों में लाई विविधता, अब 15 देशों से कर रहा आयात

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधानों से अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए भारत ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात के स्रोतों को पहले के छह देशों से बढ़ाकर कुल 15 देशों तक कर दिया है। यह जानकारी सरकार ने संसद को सोमवार को दी।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि देश ने कच्चे तेल की खरीद के स्रोतों का नेटवर्क भी व्यापक किया है। अब 27 देशों की तुलना में 41 देशों से कच्चे तेल का आयात किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “इस विविधीकरण से किसी एक देश, क्षेत्र या पारगमन मार्ग पर निर्भरता कम हुई है और आपूर्ति में व्यवधान तथा बाजार में उतार-चढ़ाव से निपटने की भारत की क्षमता बढ़ी है।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों की नियमित रूप से निगरानी की जाती है और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनियों तथा अन्य संबंधित पक्षों के साथ समन्वय में वैश्विक बाजार की स्थितियों का आकलन किया जाता है।

सरकार ने कहा कि कच्चे तेल, एलएनजी और पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता के अनुसार कदम उठाए जाते हैं।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। ऐसे में भू-राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में, जब वैश्विक ऊर्जा बाजार अत्यधिक अस्थिर हो गया है, अचानक होने वाले व्यवधानों के जोखिम को कम करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत रखना और ऊर्जा के कई स्रोतों तक पहुंच सुनिश्चित करना देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने के साथ-साथ सरकार देश की रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता का भी विस्तार कर रही है, ताकि आपूर्ति में अचानक आने वाले झटकों से निपटने की क्षमता मजबूत हो सके।

इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) क्षमता वाली तीन रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व सुविधाएं स्थापित की हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आने पर ये भंडार भी काफी उपयोगी साबित होते हैं। इन भंडारित भंडारों में रखे कच्चे तेल का इस्तेमाल सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनरियां अत्यधिक अस्थिरता के ऐसे दौर से निपटने के लिए कर सकती हैं।

सरकार ने ओडिशा और कर्नाटक में कुल 6.5 एमएमटी क्षमता वाली दो अतिरिक्त वाणिज्यिक-सह-रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व सुविधाओं को भी मंजूरी दी है। ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पडुर में इन परियोजनाओं को जुलाई 2021 में मंजूरी दी गई थी।

 

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