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Desi firms will make 5G a reality

5जी को साकार करेंगी देसी फर्में

नई दिल्ली। तीन दिग्गज देसी कंपनियों ने देश में ‘वर्चुअल’ 5जी दूरसंचार नेटवर्क (‘Virtual’ 5G telecommunications network in india) तैयार करने का बीड़ा उठाया है। अनिल अग्रवाल की स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज (Sterlite Technologies), रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Ltd) की रैडिसिस (redisis) और टेक महिंद्रा (Tech mahindra) नई पीढ़ी के इस नेटवर्क के लिए सॉफ्टवेयर, विनिर्माण और सिस्टम एकीकरण की क्षमताएं तैयार कर रही हैं।

‘वर्चुअल’ नेटवर्क में हार्डवेयर पर निर्भरता खत्म

‘वर्चुअल’ नेटवर्क (Virtual network) की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें हार्डवेयर पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। हार्डवेयर के बजाय नया नेटवर्क सॉफ्टवेयर पर केंद्रित होगा। इससे ऑपरेटरों के पास वेंडरों के अधिक विकल्प होंगे और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं या ऑपरेटरों की लागत बहुत कम हो जाएगी क्योंकि वे जरूरत के मुताबिक बैंडविड्थ का इस्तेमाल करेंगे। इसका पहला उदारहण जापान में ई-कॉमर्स कंपनी राकुतेन द्वारा बनाया गया वर्चुअल नेटवर्क है।

अभी नेटवर्क खरीदने के लिए हुआवे, जेडटीई, एरिक्सन और नोकिया गिने-चुने विकल्प

सॉफ्टवेयर कंपनी मैवरनिर के मुताबिक नए ‘वर्चुअलाइज्ड नेटवक्र्स’ से पूंजीगत व्यय 40 फीसदी तक घट जाएगा और दूरसंचार ऑपरेटरों के परिचालन खर्च में भी 34 फीसदी कमी आएगी। आसान शब्दों में समझें तो अभी दूरसंचार कंपनियों के पास नेटवर्क खरीदने के लिए हुआवे, जेडटीई, एरिक्सन और नोकिया जैसे गिने-चुने विकल्प हैं और उन्हें समूचा हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर नेटवर्क इन कंपनियों से खरीदना पड़ता है। यह अलग बात है कि ये कंपनियां नेटवर्क का रखरखाव करती हैं और उन्होंने शोध एवं विकास में बड़ी रकम खर्च की है।

ऐसा नेटवर्क भी तलाश रही कंपनियां…

मगर इस वक्त डेटा का इस्तेमाल और उसकी वजह से निवेश बढऩे के बावजूद प्रति उपभोक्ता औसत आय (एआरपीयू) ज्यादा नहीं बढ़ रही है। इस कारण दूरसंचार कंपनियां पूंजी निवेश घटाने के तरीके तलाश रही हैं। वे ऐसा नेटवर्क भी तलाश रही हैं, जिसका जरूरत के हिसाब से कम या ज्यादा इस्तेमाल किया जा सके। जो ढांचा तैयार हो रहा है, उसमें ऑपरेटरों के पास हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अलग-अलग कंपनियों से खरीदने का विकल्प होगा और वे चाहें तो बाद में खुद ही उन्हें बना भी सकते हैं। ऑपरेटर ऐसी आईटी कंपनियों से करार भी कर सकती हैं, जो हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को मिलाकर उनका नेटवर्क चलाएंगी।

जियो ने 5जी नेटवर्क के परीक्षण की इजाजत मांगी

उदारहण के लिए स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज (Sterlite Technologies) वैश्विक बाजार के लिए 4जी और 5जी रेडियो बनाने की योजना पर काम कर रही है। समूह के मुख्य तकनीकी अधिकारी डॉ. बदरी गोमातम कहते हैं, ‘हम भारत में ही 4जी और 5जी रेडियो तैयार करने में जुटे हैं और हम सिस्टम एकीकरण की सेवा भी देंगे।’ अमेरिका की कंपनी रैडिसिस ने क्वालकॉम से करार किया है, जिसके तहत वह क्वॉलकाम के 5जी नेटवर्क को अपने नए रेडियो सॉफ्टवेयर से जोड़ेगी। रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने भी सरकार ने अपनी तकनीक पर आधारित 5जी नेटवर्क (5G Network) के परीक्षण की इजाजत मांगी है। इस बारे में रिलायंस को भेजे गए ई-मेल का कोई जवाब नहीं आया।

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