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India's future will be decided by investment in innovation, AI will play the role of a game changer: PM Modi

पीएम स्वनिधि के 6 साल पूरे: प्रधानमंत्री मोदी ने लाभार्थियों को दी बधाई, कहा- ‘यह योजना भरोसे, सम्मान और सशक्तिकरण का प्रतीक’

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (पीएम स्वनिधि) के छह वर्ष पूरे होने पर देशवासियों और योजना के लाभार्थियों को बधाई दी और कहा कि यह योजना लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आई है। बिना किसी गारंटी के ऋण, वित्तीय समावेशन और व्यवसाय बढ़ाने के नए अवसर उपलब्ध कराकर इस योजना ने छोटे कारोबारियों को नई पहचान दी है।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि भरोसे, गरिमा और सशक्तिकरण का प्रतीक है। उन्होंने सभी लाभार्थियों के परिश्रम और उद्यमशीलता की सराहना करते हुए कहा कि वे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने माय गव इंडिया की एक पोस्ट भी साझा की, जिसमें कहा गया कि पीएम स्वनिधि के छह वर्षों ने रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के जीवन में केवल बदलाव ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, नए अवसर और बेहतर भविष्य की उम्मीद भी पैदा की है। यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वरोजगार, स्वावलंबन और स्वाभिमान के जरिए आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

वहीं, 30 मई को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना भारत की अनौपचारिक शहरी अर्थव्यवस्था में काम करने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर्स के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है। वर्ष 2020 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को साहूकारों पर निर्भरता से मुक्त कर उन्हें संस्थागत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना था। आज यह योजना सिर्फ ऋण देने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि डिजिटल समावेशन, सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बन चुकी है।

सरकार के अनुसार, योजना के तहत अब तक 75.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1.12 करोड़ से ज्यादा ऋण वितरित किए जा चुके हैं। इन ऋणों का कुल मूल्य 17,800 करोड़ रुपए से अधिक है। इसके अलावा 55 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इन लाभार्थियों ने मिलकर 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपए रहा है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लाभार्थियों को करीब 800 करोड़ रुपए की कैशबैक और ब्याज सब्सिडी भी दी गई है। योजना की सफलता को देखते हुए इसे मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया है।

इस योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराया जाता है। लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से 15,000, 25,000 और 50,000 रुपए तक का ऋण दिया जाता है। समय पर ऋण चुकाने वालों को ब्याज सब्सिडी और क्रेडिट गारंटी का लाभ भी मिलता है।

दूसरी ऋण किस्त सफलतापूर्वक चुकाने वाले विक्रेताओं को 30,000 रुपए तक की सीमा वाला यूपीआई से जुड़ा रुपे क्रेडिट कार्ड भी उपलब्ध कराया जाता है। डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करने के लिए 1,600 रुपए तक का कैशबैक दिया जाता है। इसके अलावा ‘स्वनिधि से समृद्धि’ कार्यक्रम के तहत लाभार्थियों और उनके परिवारों को विभिन्न केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाता है।

इसके साथ ही बयान में आगे कहा गया कि इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता और खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जाता है। यह प्रशिक्षण भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के सहयोग से संचालित किया जाता है, जिससे छोटे कारोबारियों को अपने व्यवसाय को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलती है।

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