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BSE Sensex completes 40 years, established as the country's economic indicator

अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद से बाजार में रही रौनक, हफ्ते भर में निफ्टी और सेंसेक्स ने दर्ज की करीब 1.7 प्रतिशत की बढ़त

मुंबई. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बढ़ी उम्मीदों तथा ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट के कारण निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ, जिसके चलते भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक लगातार दूसरे सप्ताह मजबूत बढ़त दर्ज करने में सफल रहे।

इस सप्ताह के दौरान निफ्टी में 1.65 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन इसमें 0.64 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 24,013.10 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 607 अंक यानी 0.78 प्रतिशत गिरकर 76,802 पर बंद हुआ। इसके बावजूद पूरे सप्ताह में सेंसेक्स ने 1.69 प्रतिशत की बढ़त हासिल की।

सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन घरेलू बाजार में सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला। हाल के तीन कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद आईटी शेयरों में तेज बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव बना रहा।

वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमतें अमेरिका-ईरान शांति समझौते की संभावनाओं के बीच 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई थीं, लेकिन सप्ताह के अंत में शांति वार्ता अचानक रद्द होने और मुनाफावसूली के चलते कीमतों में गिरावट का सिलसिला थम गया।

सप्ताह के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 79 पैसे मजबूत होकर 94.35 प्रति डॉलर के स्तर के आसपास पहुंच गया।

विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक स्थिति में सुधार से अगले सप्ताह भी बाजार की धारणा को समर्थन मिल सकता है।

सप्ताह के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच 14 बिंदुओं वाले एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए। इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने पर सहमति बनी।

क्षेत्रीय सूचकांकों की बात करें तो कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल एस्टेट, फार्मा और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली।

डिफेंस सेक्टर ने सप्ताह के दौरान 6.6 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे क्षेत्र की मजबूत बुनियादी स्थिति प्रमुख कारण रही।

आईटी सेक्टर सप्ताह का सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 6.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

यह गिरावट तब आई जब वैश्विक आईटी कंपनी एक्सेंचर ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपनी स्थिर मुद्रा राजस्व वृद्धि का अनुमान घटा दिया और उम्मीद से कमजोर आउटलुक जारी किया।

मौद्रिक नीति के मोर्चे पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सतर्क और आंकड़ों पर आधारित रुख बनाए रखा तथा भविष्य के लिए सीमित संकेत दिए। इससे यह धारणा मजबूत हुई कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का भी रुख सतर्क बना हुआ है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और ब्रिटेन तथा अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों में प्रगति से आर्थिक परिदृश्य में धीरे-धीरे सुधार हो सकता है। फिर भी स्पष्ट नीति दिशा सामने आने में एक-दो और समीक्षा बैठकों का समय लग सकता है।

सप्ताह के दौरान व्यापक बाजार ने प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। हफ्ते भर में निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 2.62 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 3.23 प्रतिशत की उछाल आई।

निवेशक भारत में मानसून की प्रगति पर भी नजर बनाए हुए हैं। जून महीने में अब तक कुल वर्षा सामान्य से 38 प्रतिशत कम दर्ज की गई है और अल नीनो की स्थिति बनी हुई है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून की प्रगति में और देरी होती है तो खरीफ फसलों की बुआई, खाद्य महंगाई और ग्रामीण मांग को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।

इसके अलावा, आने वाले दिनों में भारत के पीएमआई और क्रेडिट ग्रोथ के आंकड़े, साथ ही अमेरिका के पीसीई मुद्रास्फीति और जीडीपी आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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