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सीपीग्राम्स और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट से बढ़ रही पारदर्शिता, नागरिक-केंद्रित बन रहा शासन: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली. केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि सीपीग्राम्स (केंद्रीयकृत जन शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली) और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जैसी पहलें भारत में शासन व्यवस्था को बदल रही हैं। इनसे पारदर्शिता बढ़ी है, सेवाओं की डिलीवरी बेहतर हुई है और प्रशासन अधिक नागरिक-केंद्रित बना है। उन्होंने दक्षिण कोरिया के गृह एवं सुरक्षा मंत्री यून होजुंग के साथ बातचीत के दौरान भारत की डिजिटल गवर्नेंस उपलब्धियों को रेखांकित किया और ई-गवर्नेंस, एआई तथा लोक प्रशासन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने का आह्वान किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ये बातें दक्षिण कोरिया के गृह एवं सुरक्षा मंत्री यून होजुंग के साथ बैठक के दौरान कहीं, जो इन दिनों भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं।

दोनों नेताओं ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों के साथ एक घंटे से अधिक समय तक व्यापक द्विपक्षीय चर्चा की। इस दौरान डिजिटल गवर्नेंस, लोक प्रशासन, क्षमता निर्माण और नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ।

दक्षिण कोरियाई प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार और सुशासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।

उन्होंने इस वर्ष दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के दौरान जारी संयुक्त रणनीतिक दृष्टि वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण रोडमैप है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की डिजिटल गवर्नेंस में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि तकनीक-आधारित शासन प्लेटफॉर्मों ने सेवाओं की डिलीवरी और शिकायत निवारण तंत्र को काफी मजबूत किया है।

उन्होंने कहा कि सीपीग्राम्स और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जैसी पहलों ने पारदर्शिता बढ़ाई है, प्रक्रियात्मक बाधाओं को कम किया है और शासन को आम नागरिकों के और करीब लाया है।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया जीवंत लोकतंत्र हैं, जिनके बीच साझा मूल्य, सांस्कृतिक संबंध और कानून के शासन के प्रति समान प्रतिबद्धता है।

उन्होंने कहा कि एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में दोनों देशों की साझेदारी केवल ऐतिहासिक ही नहीं बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर भी विकसित हो रही है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने अयोध्या की राजकुमारी सुरिरत्ना और प्राचीन गया संघ के राजा सुरो के वैवाहिक संबंध का उल्लेख किया, जो आज भी दोनों देशों के लिए सांस्कृतिक महत्व रखता है।

उन्होंने भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को मजबूत बनाने में यून होजुंग के योगदान की सराहना की, खासकर कोरिया-भारत संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

डॉ. सिंह ने विश्वास जताया कि यून होजुंग की यह भारत यात्रा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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